गांधी के ग्राम स्वराज और शास्त्री के ‘जय जवान, जय किसान’ के विचारों को गांव-गांव पहुंचाने का संकल्प लें : टीकाराम जूली
अलवर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में दोनों महान विभूतियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर केवल दो महान नेताओं की जयंती नहीं, बल्कि यह दिन हमें ग्राम स्वराज, लोकतंत्र, जनभागीदारी, सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा के संकल्प की याद दिलाता है।
जूली ने कहा कि महात्मा गांधी का सपना ऐसा भारत बनाने का था, जहां गांव केवल प्रशासन की इकाई नहीं, बल्कि विकास और लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला हों। गांधीजी ने ग्राम स्वराज की कल्पना के माध्यम से गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की बात कही थी। ऐसे में आज जब पंचायती राज चुनाव का दौर सामने है, गांधीजी के ग्राम स्वराज के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।
गांव की सरकार मजबूत होगी तो लोकतंत्र मजबूत होगा
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। गांव की सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों की भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायतों को मजबूत और जवाबदेह बनाकर ही ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को गति दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि पंचायती राज चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि गांव के भविष्य की दिशा तय करने का अवसर भी है। ग्रामीण मतदाताओं को विकास, पारदर्शिता, जनसेवा और जवाबदेही को प्राथमिकता देने वाले जनप्रतिनिधियों के चयन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
शास्त्री जी का ‘जय किसान’ आज भी गांव की ताकत
जूली ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को नमन करते हुए कहा कि शास्त्री जी ने कठिन परिस्थितियों में देश का नेतृत्व किया और ‘जय जवान, जय किसान’ का संदेश देकर देश की सुरक्षा और किसानों के महत्व को रेखांकित किया। आज भी गांव की अर्थव्यवस्था और देश की प्रगति में किसान की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण समाज के प्रत्येक वर्ग की आवाज को उचित प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है। गांव के विकास की योजनाएं तभी प्रभावी होंगी, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
जूली ने कहा कि पंचायती राज चुनाव में राजनीतिक चर्चा का केंद्र गांव की समस्याएं और ग्रामीणों का विकास होना चाहिए। पेयजल, सिंचाई, सड़क, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, रोजगार और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि गांधीजी ने सत्य और अहिंसा का रास्ता दिखाया और शास्त्री जी ने सादगी, ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण प्रस्तुत किया। आज जरूरत है कि सार्वजनिक जीवन में इन मूल्यों को मजबूत किया जाए और लोकतंत्र को धनबल तथा दिखावे से नहीं, बल्कि जनसेवा और जनविश्वास से मजबूत किया जाए।
गांधी के ग्राम स्वराज और शास्त्री के जनसेवा के विचार बनें चुनावी संकल्प
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि गांधी जयंती और शास्त्री जयंती के अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि गांव की सरकार को मजबूत बनाएंगे, जनता की आवाज को प्राथमिकता देंगे और विकास के संसाधनों का पारदर्शी एवं न्यायपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करेंगे।
उन्होंने कहा कि गांधीजी का ग्राम स्वराज और शास्त्री जी का ‘जय जवान, जय किसान’ केवल नारे नहीं, बल्कि देश के विकास की दिशा दिखाने वाले विचार हैं। पंचायती राज चुनाव के इस दौर में इन विचारों को गांव-गांव तक पहुंचाना और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना ही दोनों महान विभूतियों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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