मुंबई। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मुंबई के वडाला में एक निर्माण परियोजना के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी जारी करने की एवज में एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगने और अंततः सौदा 70 लाख रुपये में तय करने के बहुचर्चित मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इस सिलसिले में सीबीआई ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के मुंबई स्थित कार्यकारी अभियंता समेत कुल पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है और जाल बिछाकर 50 लाख रुपये की घूस की रकम भी बरामद कर ली है।
एनओसी के नाम पर एक करोड़ की रिश्वत और सौदा
मामले की शुरुआत तब हुई जब वडाला में एक भूखंड पर निर्माण परियोजना शुरू करने वाली रियल एस्टेट कंपनी को इस बात के प्रमाण की आवश्यकता थी कि उस जमीन पर सीपीडब्ल्यूडी का कोई भी मालिकाना हक या दावा नहीं है। सीबीआई की जाँच में सामने आया कि सीपीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंता विक्रांत वर्मा ने इस एनओसी को जारी करने के बदले पुणे में रहने वाले अपने रिश्तेदार सौरव कुमार के जरिए एक करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की थी। बाद में लंबी मोलभाव के बाद यह तयशुदा रकम घटाकर 70 लाख रुपये पर फाइनल की गई थी, जिसे बिना किसी आधिकारिक कागजी कार्रवाई के गुप्त रूप से देने की साजिश रची गई थी।
सीबीआई का सफल जाल और पाँचों आरोपियों की गिरफ्तारी
अपनी पुख्ता सूचना और योजना के तहत सीबीआई ने एक अक्टूबर को एक विशेष जाल बिछाया। जांच एजेंसी के मुताबिक, जैसे ही रियल एस्टेट समूह के उपाध्यक्ष अरविंद सेमवाल से 50 लाख रुपये की पहली किस्त सौरव कुमार ने ली और उसे लेकर आगे बढ़ा, सीबीआई की टीम ने उसे धर दबोचा। इसके बाद नवी मुंबई के वाशी इलाके से कार्यकारी अभियंता विक्रांत वर्मा को भी दबोच लिया गया जो इस रिश्वत की रकम को लेने के लिए ही इंतजार कर रहा था। इस पूरी कार्रवाई के दौरान कंपनी के प्रबंधक चेतन महाजन और बाया समूह से जुड़ी ‘एम/एस रेनेसाँ’ फर्म के साझेदार अनिल देशमुख को भी गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे कुल गिरफ्तारियों का आंकड़ा पाँच तक पहुँच गया।
भारी मात्रा में नकदी और संपत्तियों के दस्तावेज बरामद
इस सनसनीखेज मामले के खुलासे के बाद सीबीआई ने मुंबई, नवी मुंबई और पुणे में आरोपियों से जुड़े कई ठिकानों पर व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान चलाया। इस छापेमारी के दौरान रिश्वत के 50 लाख रुपये के अलावा 53.87 लाख रुपये की अतिरिक्त नकदी, विभिन्न अचल संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और कई अन्य गोपनीय कागजात बरामद किए गए। जाँच में यह भी खुलासा हुआ कि जिस एनओसी के एवज में यह घूस ली जा रही थी, उसे बिना किसी आधिकारिक डिस्पैच रजिस्टर में प्रविष्टि किए ही अवैध रूप से जारी कर दिया गया था, जबकि शेष 20 लाख रुपये की बकाया रकम एक हफ्ते बाद दी जानी तय हुई थी। सभी पाँचों आरोपियों को अदालत में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।


