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    क्या वंशवृद्धि में आ रही है रुकावट? ज्योतिषी ने बताया पंचवली का खास उपाय, जानें तर्पण की विधि

    यदि किसी परिवार में लंबे समय से संतान प्राप्ति में बाधा बनी हुई है तो पितृपक्ष में पूर्वजों का विधिवत स्मरण, तर्पण और सेवा करना शुभ माना जाता है. करौली के कर्मकांड ज्योतिषी मनीष उपाध्याय ने बताया कि ऐसी स्थिति में परिवार अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार पितरों के निमित्त तर्पण के साथ पंचबली भी कर सकता है.
    पितृपक्ष को सनातन परंपरा में पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके निमित्त तर्पण, श्राद्ध व दान करने का समय माना जाता है. इन दिनों लोग अपने पितरों की तिथि के अनुसार तर्पण और श्राद्ध कर्म करते हैं. वहीं ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, यदि किसी परिवार में लंबे समय से संतान प्राप्ति में बाधा बनी हुई है तो पितृपक्ष में पूर्वजों का विधिवत स्मरण, तर्पण और सेवा करना शुभ माना जाता है.

    करौली के कर्मकांड ज्योतिषी मनीष उपाध्याय ने बताया कि ऐसी स्थिति में परिवार अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार पितरों के निमित्त तर्पण के साथ पंचबली भी कर सकता है.वह बताते है कि पितृपक्ष में पितरों के निमित्त जल अर्पित करने की परंपरा है. यदि कोई व्यक्ति पूरे पितृपक्ष में तर्पण नहीं कर पाता है तो वह अपने पूर्वज की श्राद्ध तिथि पर भी विधि-विधान से तर्पण कर सकता है.

    तर्पण के लिए जल में तिल, जौ, अक्षत और कच्चा दूध मिलाया जा सकता है. हाथ में कुश लेकर पितरों का स्मरण करते हुए जल अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता के अनुसार यह कर्म श्रद्धा और नियमपूर्वक किया जाना चाहिए.

    ज्योतिषी उपाध्याय बताते हैं कि जिन परिवारों में संतान प्राप्ति को लेकर लंबे समय से परेशानी है, वे पितृपक्ष के दौरान अपने पूर्वजों का विधिवत स्मरण कर सकते हैं. पितरों की तिथि पर तर्पण करने के साथ उनकी पसंद के भोजन का भोग लगाने और जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा भी बताई गई है.

    पितृपक्ष में पंचबली की परंपरा का भी विशेष उल्लेख मिलता है. ज्योतिषी के अनुसार इसमें कौआ, गाय, चींटी, मछली और देवताओं के निमित्त भोजन अर्पित किया जाता है. इसके लिए घर में तैयार भोजन का कुछ हिस्सा अलग निकालकर परंपरा के अनुसार इनका भोग लगाया जा सकता है.

    इसके साथ ही ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को श्रद्धापूर्वक भोजन कराने और यथासंभव दान-दक्षिणा देने की परंपरा है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस प्रकार पितरों का स्मरण और सेवा करने से परिवार में सुख-समृद्धि तथा संतान सुख की कामना की जाती है.

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