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    कंवरलाल पाटनी को अंतिम विदाई, गहलोत-भागीरथ चौधरी सहित हजारों लोग अंतिम यात्रा में हुए शामिल

    अलवर के अनिल राखी परिवार ने शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की

    किशनगढ़, अलवर। प्रसिद्ध मार्बल उद्योगपति एवं समाजसेवी अशोक पाटनी के पिता और वरिष्ठ समाजसेवी भामाशाह कंवरलाल पाटनी का रविवार को अंतिम संस्कार किया गया। 97 वर्ष की आयु में शनिवार रात उनके निधन के बाद किशनगढ़ सहित मार्बल उद्योग, जैन समाज और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। रविवार सुबह बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। अलवर के अनिल राखी परिवार ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। परिवार के बच्चू सिंह जैन ने उन्हें समाज व देश के प्रति गंभीर चिंतन वाला व्यक्ति बताया है।

    कंवरलाल पाटनी की अंतिम यात्रा रविवार सुबह 10 बजे किशनगढ़ स्थित आरके हाउस से रवाना हुई। RK House, Kishangarh अंतिम यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए संवत्सर स्थित मुक्तिधाम पहुंची, जहां विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री तथा अजमेर सांसद भागीरथ चौधरी सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल हुए। उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों, जैन समाज और शहर के विभिन्न वर्गों से जुड़े बड़ी संख्या में लोग भी अंतिम यात्रा में पहुंचे और पाटनी को श्रद्धांजलि दी।

    कंवरलाल पाटनी के निधन की खबर सामने आने के बाद बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग, मार्बल कारोबारी, सामाजिक कार्यकर्ता, शुभचिंतक और परिचित आरके हाउस पहुंचे। लोगों ने पाटनी परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।

    समाजसेवा और जनकल्याण के लिए रहे याद किए जाएंगे

    कंवरलाल पाटनी को समाजसेवा, जनकल्याण और जरूरतमंदों की सहायता के लिए जाना जाता था। उनके निधन को किशनगढ़ के सामाजिक और औद्योगिक क्षेत्र के साथ-साथ जैन समाज के लिए बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।

    परिचितों और समाजजनों ने उनके जीवन में किए गए सामाजिक कार्यों को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी। उनके निधन से किशनगढ़ के मार्बल उद्योग में भी शोक का माहौल रहा। रिपोर्ट के अनुसार उनके अंतिम दर्शन और अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही तथा शहर के बाजार भी बंद रहे। पाटनी परिवार के लिए यह समय भावनात्मक क्षति का है। अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने कंवरलाल पाटनी के प्रति लोगों के सम्मान और उनके सामाजिक संबंधों की व्यापकता को भी सामने रखा।

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