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    कुम्हेर बाल विकास परियोजना में फेरबदल पर उठे सवाल, डीग से स्टाफ लगाने पर चिंता

    प्रशासनिक बदलाव के बीच कुम्हेर में मानदेय भुगतान और पोषण योजनाओं की स्थिति को लेकर सवाल, डीग में पहले से स्टाफ की कमी

    डीग। महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाएं गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, शिशुओं तथा बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से सीधे जुड़ी हुई हैं। ऐसे में कुम्हेर बाल विकास परियोजना की प्रशासनिक व्यवस्था में किए गए फेरबदल और मानव संसाधन के पुनर्समायोजन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस बदलाव से डीग जिले में संचालित पोषण योजनाओं की गति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

    पहले से स्टाफ होने के बावजूद डीग से कार्मिक लगाने पर सवाल

    बताया गया है कि कुम्हेर बाल विकास परियोजना लंबे समय से अनुभवी एवं प्रशिक्षित गैर-सरकारी संगठन के स्टाफ के सहयोग से संचालित हो रही थी। इसके बावजूद परियोजना का प्रशासनिक प्रभार नगर सीडीपीओ को दिए जाने तथा डीग परियोजना से बड़ी संख्या में कार्मिकों को कुम्हेर में लगाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डीग जिले में ही महिला पर्यवेक्षकों और कार्यालय स्टाफ की कमी बताई जा रही है, तो उपलब्ध सीमित मानव संसाधन को दूसरी परियोजना में लगाने का प्रशासनिक औचित्य क्या है।

    जिले की चार परियोजनाओं में से केवल दो परियोजनाओं पर विभागीय सीडीपीओ उपलब्ध होने तथा अधिकारियों के पास अतिरिक्त प्रभार होने की स्थिति में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय को लेकर भी चिंता

    प्रशासनिक फेरबदल के बीच कुम्हेर परियोजना की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय भुगतान में देरी की स्थिति सामने आने की बात कही जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में समय पर मानदेय भुगतान को विभाग की प्राथमिकता माना जाना चाहिए।

    पोषण योजनाओं की निगरानी पर भी उठे सवाल

    विभाग की प्राथमिकता पोषण सामग्री की समय पर उपलब्धता, वितरण, लाभार्थियों की निगरानी, पोषण ट्रैकर में शत-प्रतिशत जानकारी अद्यतन करने तथा गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना होना चाहिए।

    गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, पोषण सामग्री की उपलब्धता और वितरण में अंतर जैसे विषय सीधे मातृ स्वास्थ्य, प्रसव के दौरान संभावित जटिलताओं, नवजात स्वास्थ्य और बच्चों में कुपोषण से जुड़े हैं। ऐसे में प्रशासनिक फेरबदल के कारण यदि जमीनी योजनाओं की गति प्रभावित होती है तो इसका असर सीधे लाभार्थियों पर पड़ सकता है।

    पोषण ट्रैकर और योजनाओं की समीक्षा की जरूरत

    कुम्हेर परियोजना में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय भुगतान की स्थिति की समीक्षा के साथ पोषण ट्रैकर, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, उड़ान योजना, पोषाहार वितरण तथा अन्य विभागीय योजनाओं की वास्तविक प्रगति का भी आकलन किए जाने की आवश्यकता बताई जा रही है।

    साथ ही डीग जिले में उपलब्ध मानव संसाधन और परियोजनावार स्टाफ की स्थिति की समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि प्रशासनिक पुनर्समायोजन का असर महिला एवं बाल विकास योजनाओं के नियमित संचालन पर न पड़े।

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