श्राद्धकाल में कथा श्रवण, अन्न दान, गौ सेवा और तर्पण को बताया पुण्यकारी, पूर्वजों की शांति के उपायों पर हुई चर्चा
लक्ष्मणगढ़। कस्बे की खंडेलवाल धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को पितृपक्ष के अवसर पर पितृ दान, श्राद्ध और तर्पण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कथावाचक ज्योति शिखा दीदी ने संगीतमय व्याख्या के माध्यम से श्रद्धालुओं को पितृपक्ष में किए जाने वाले धार्मिक कार्यों के महत्व के बारे में बताया।
पितृपक्ष में दान और कथा श्रवण का महत्व
कथावाचक ज्योति शिखा दीदी ने बताया कि संतों के अनुसार पितृपक्ष में किए गए दान-पुण्य और श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि पितृपक्ष में भागवत कथा सुनने या करवाने से जीवन में आने वाले दुख और कष्टों से मुक्ति तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।
पितृ ऋण से मुक्ति की बताई मान्यता
कथा के दौरान बताया गया कि मनुष्य पर देव ऋण और ऋषि ऋण के साथ पितृ ऋण भी माना गया है। भागवत कथा के श्रवण तथा धार्मिक दान-पुण्य के माध्यम से पितृ ऋण से मुक्ति की धार्मिक मान्यता बताई गई।
अन्न दान और गौ सेवा का महत्व
कथावाचक ने पितृपक्ष में अन्न दान, गौ सेवा, ब्राह्मण भोजन और पिंडदान के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार इन कार्यों से पूर्वजों की तृप्ति होती है और उनका आशीर्वाद परिवार को सुख-समृद्धि प्रदान करता है।
पितृ दोष की शांति पर भी चर्चा
कथा में पितृ दोष की शांति को लेकर भी जानकारी दी गई। बताया गया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष माना गया हो तो तीर्थस्थलों पर पिंडदान के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण या पाठ कराना प्रभावशाली और मोक्षदायी माना जाता है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद
कथा के दौरान महिलाओं सहित खंडेलवाल समाज के अध्यक्ष मदनलाल गुप्ता, नवीन खारवाल, गोविंद खारवाल, खेमचंद बैरवा, प्रकाश प्रजापत, लोकेश कुमार, गंगा लहरी, लल्लूराम सैनी सहित अनेक व्यापारी और समाजजन मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ कथा का श्रवण किया।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


