कोटकासिम की ऐतिहासिक रामलीला में सीता जन्म और मेघनाद दिग्विजय का मंचन, कलाकारों ने अभिनय से मोहा दर्शकों का मन
कोटकासिम। कोटकासिम नगर में दिन के समय खुले मैदान में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक रामलीला में शुक्रवार को सीता जन्म और मेघनाद दिग्विजय की लीलाओं का भव्य मंचन किया गया। रामलीला कमेटी अध्यक्ष नरेंद्र सोनी (लादू) की अगुवाई और निर्देशक चतुर्भुज शर्मा के निर्देशन में शाम चार बजे तीसरे दिन की लीला प्रस्तुत की गई। रामलीला के प्रसंगों ने दर्शकों को धर्म और भक्ति से जुड़ी कथाओं से रूबरू कराया।
धरती के गर्भ से प्रकट हुईं माता सीता
रामलीला कमेटी के मीडिया प्रभारी योगेश अग्रवाल ने बताया कि मंचन के पहले प्रसंग में जनकपुर में लंबे समय से वर्षा नहीं होने के कारण सूखे और अकाल की स्थिति दिखाई गई। इस संकट से मुक्ति पाने के लिए राजा जनक ने गुरु शतानंद के निर्देश पर धरती पर सोने का विशेष हल चलाया। इसी दौरान हल की नोक धरती में दबे एक कलश से टकराई। कलश से एक नवजात कन्या प्रकट हुई।
राजा जनक ने कन्या को भगवान विष्णु का उपहार मानते हुए अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया और उसका नाम सीता रखा। इस प्रसंग का मंचन दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
शिव धनुष उठाकर सीता ने किया सभी को चकित
अगले दृश्य में किशोर अवस्था की सीता को भगवान शिव के धनुष की सफाई और पूजा-अर्चना करते हुए दिखाया गया। इस दौरान सीता ने धनुष को एक हाथ से उठा लिया। जब राजा जनक को इसकी जानकारी मिली तो वे आश्चर्यचकित रह गए, क्योंकि जिस धनुष को उठाने में अनेक योद्धाओं को भी कठिनाई होती थी, उसे सीता ने सहजता से उठा लिया था।
इस घटना के बाद राजा जनक ने प्रतिज्ञा की कि जनकपुर के महल में रखे भगवान शिव के प्रिय धनुष ‘पिनाक’ पर जो वीर योद्धा प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ सीता का विवाह किया जाएगा। इस प्रसंग ने आगे होने वाले सीता स्वयंवर की कथा की भूमिका तैयार की।
इंद्र को पराजित कर मेघनाद कहलाया इंद्रजीत
रामलीला के दूसरे प्रमुख प्रसंग में मेघनाद की दिग्विजय का मंचन किया गया। कथा के अनुसार, मेघनाद ने देवराज इंद्र सहित देवताओं को पराजित कर उन्हें बंदी बना लिया। इसके बाद ब्रह्मा जी के कहने पर मेघनाद ने इंद्र को मुक्त कर दिया।
इससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने मेघनाद को अजेय रथ प्रदान किया। साथ ही, देवराज इंद्र को पराजित करने के कारण उसे ‘इंद्रजीत’ नाम दिया। इस प्रसंग में कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से रामायण की कथा को जीवंत किया।
कलाकारों के अभिनय ने जीता दर्शकों का दिल
रामलीला में राजा जनक की भूमिका योगेश अग्रवाल, रानी सुनयना की भूमिका निशांत सैनी, बाल सीता की भूमिका करिश्मा गुप्ता और किशोर सीता की भूमिका भावेश सैनी ने निभाई। सुमंत और शनिदेव के पात्र योगेश ज्योतिषी, गुरु शतानंद और नारद की भूमिका यशवंत जोशी, रावण की भूमिका दिनेश सैनी, मेघनाद की भूमिका दीपक रोहिल्ला और इंद्रदेव की भूमिका पीयूष गुप्ता ने निभाई।
इसी प्रकार भगवान शंकर की भूमिका प्रवीण सैन, ब्रह्मा जी की भूमिका पार्षद मुकेश गुप्ता और कालदेव की भूमिका इशांत बाघोरिया ने निभाई। सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया।
कोटकासिम की इस ऐतिहासिक रामलीला में धार्मिक प्रसंगों के सजीव मंचन के माध्यम से दर्शकों को रामायण की महत्वपूर्ण घटनाओं को देखने का अवसर मिला।
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