लक्ष्मणगढ़ में श्रद्धा और विधि-विधान से हुए सर्वपितृ अनुष्ठान, ब्राह्मण भोज और दान-पुण्य कर पुरखों से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा
लक्ष्मणगढ़। पितृ पक्ष के अंतिम दिन शनिवार को लक्ष्मणगढ़ कस्बे सहित उपखंड क्षेत्र में सर्वपितृ अमावस्या श्रद्धा और धार्मिक आस्था के साथ मनाई गई। इस अवसर पर लोगों ने विधि-विधान से अपने पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण कर उन्हें विदाई दी। घरों में पितरों के निमित्त पूजा-अर्चना की गई तथा ब्राह्मण भोज और दान-पुण्य के आयोजन भी हुए।
श्राद्ध-तर्पण कर पूर्वजों का किया स्मरण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर पूर्वजों का स्मरण कर उनके निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने का विशेष महत्व है। इसी मान्यता के चलते लोगों ने श्रद्धापूर्वक धार्मिक अनुष्ठान किए और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू हुआ पितृ पक्ष 10 अक्टूबर को आश्विन मास की अमावस्या के साथ संपन्न हुआ। पितृ पक्ष की अंतिम तिथि को सर्वपितृ अमावस्या या पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है।
ज्ञात-अज्ञात पितरों के लिए किया श्राद्ध
मान्यता है कि जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जो किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाते, वे सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं। इस दिन ज्ञात और अज्ञात सभी पितरों के निमित्त धार्मिक कर्म करने की परंपरा है।
पितरों के निमित्त दान-पुण्य का विशेष महत्व
पंडित लोकेश कुमार ने बताया कि शास्त्रों में सर्वपितृ अमावस्या पर सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करने, ब्राह्मण भोज कराने और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है।
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों की प्रसन्नता से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसी आस्था के साथ लोगों ने धार्मिक अनुष्ठान कर पितृ पक्ष का समापन किया।
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