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    क्या इक्विटी पर LTCG टैक्स हटेगा? SBI रिसर्च की सिफारिश से बाजार में चर्चा तेज

    देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अर्थशास्त्रियों ने इक्विटी पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को पूरी तरह से खत्म करने की जोरदार वकालत की है। सोमवार को प्रकाशित अपनी नवीनतम 'इकोरैप' रिपोर्ट में एसबीआई रिसर्च ने यह सुझाव दिया है। उनका मानना है कि इस कदम से विदेशी और घरेलू निवेशक भारतीय शेयर बाजार में लंबे समय तक अपनी पूँजी निवेशित बनाए रखेंगे। यह प्रस्ताव शेयर बाजार से अचानक होने वाले विदेशी पूंजी के बहिर्प्रवाह (आउटफ्लो) के जोखिम को कम करने और रुपये की विनिमय दर को स्थिरता प्रदान करने में मददगार साबित होगा।

    वर्तमान कर ढांचा और विदेशी निवेशकों की निकासी

    वर्तमान समय में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय इक्विटी निवेश पर 12.5 प्रतिशत की दर से एलटीसीजी कर का भुगतान करते हैं। केंद्रीय बजट 2026 में सूचीबद्ध शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर इस 12.5% की कर दर को यथावत बनाए रखा गया था। यह व्यवस्था वर्ष 2024 के एक बड़े राजकोषीय सुधार के दौरान लागू की गई थी। दूसरी ओर, हालिया आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर माह के दौरान भारतीय शेयर बाजारों से कुल 44,166 करोड़ रुपये की भारी निकासी की है, जिससे इस वर्ष कुल बहिर्प्रवाह तीन लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।

    एलटीसीजी कर हटाने का सुझाव क्यों दिया गया है?

    एसबीआई रिसर्च ने सरकार से अनुरोध किया है कि इक्विटी सेगमेंट में अस्थिर पूंजी प्रवाह को नियंत्रित करने और उसे स्थिरता देने पर गंभीरता से विचार किया जाए। इसके लिए होल्डिंग अवधि को 2 से 3 वर्ष तक बढ़ाने तथा इक्विटी पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स कर को पूरी तरह से समाप्त करने का विकल्प सुझाया गया है। ऐसा करने से विदेशी निवेशकों की पूँजी भारतीय बाजार में लंबे समय तक टिकेगी और भारतीय मुद्रा (रुपये) पर पड़ने वाला दबाव भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

    विदेशी निवेशक क्यों निकाल रहे हैं अपना पैसा?

    वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, मजबूत होता अमरीकी डॉलर और अमरीकी बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही वृद्धि प्रमुख हैं। इसके अलावा, उत्तर एशियाई बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित शेयरों की तेजी भी विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही है। भारतीय इक्विटी से एफपीआई की यह निकासी वर्ष 2026 में बढ़कर 3.04 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच चुकी है, जो कि वर्ष 2025 में दर्ज 1.66 लाख करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है। भारत में एआई-थीम वाले शेयरों की सीमित उपलब्धता और अन्य देशों (विशेषकर अमरीका) में बढ़ती यील्ड भी इसका एक मुख्य कारण है।

    एसबीआई रिसर्च के अन्य प्रमुख सुझाव

    • निर्यात आय की वापसी: रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया गया है कि निर्यात से होने वाली आय को लगभग छह महीने की उचित समयावधि के भीतर सुव्यवस्थित किया जाए। निर्यातकों को सामान्यतः विदेशी खरीदारों को क्रेडिट अवधि देने के लिए यह समय मिलता है।

    • विथहोल्डिंग टैक्स पर स्पष्टता: एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECB) पर वर्तमान में लगने वाले 5 से 20 प्रतिशत के विथहोल्डिंग टैक्स को लेकर अधिक स्पष्टता की मांग की गई है, ताकि डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के तहत मिलने वाले लाभों को सुचारू रूप से लागू किया जा सके।

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