मुंबई। महाराष्ट्र राज्य में नकली, घटिया और बिना लाइसेंस के बिकने वाली औषधियों पर नकेल कसते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने एक बड़ा और कड़ा अभियान चलाया है। एफडीए द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल जून से सितंबर के बीच राज्य भर में दवा निर्माण और उनकी बिक्री से जुड़े कुल 4,256 व्यापारिक प्रतिष्ठानों की सघन जांच और छापेमारी की गई। इस पूरी कार्रवाई के दौरान लगभग 19.11 करोड़ रुपये मूल्य का संदिग्घ और अवैध दवा स्टॉक जब्त किया गया है। विभाग ने इस अवधि में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कुल 33 एफआईआर दर्ज की हैं और 14 आरोपियों को पुलिस हिरासत में लिया गया है। एफडीए के मुताबिक, शुरुआती दो महीनों यानी अप्रैल-मई की तुलना में जून-सितंबर के दौरान निरीक्षण की रफ्तार में कई गुना तेजी लाई गई है। शुरुआती दो महीनों में जहां महज 467 निरीक्षण किए गए थे, वहीं अगले चार महीनों में यह आंकड़ा बढ़कर 4,256 पर पहुंच गया।
बड़े पैमाने पर लाइसेंस रद्द और निलंबित
एफडीए के विस्तृत आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि जून से सितंबर के चार महीनों के भीतर दवा निर्माण करने वाली 148 और दवा की बिक्री से जुड़ी 996 इकाइयों के खिलाफ कड़ी नियामक कार्रवाई की गई है। इस समयावधि में कुल 1,402 आधिकारिक नोटिस जारी किए गए। दवा कानूनों के गंभीर उल्लंघनों के चलते 288 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिए गए, जबकि 856 अन्य इकाइयों के लाइसेंस कुछ समय के लिए निलंबित कर दिए गए। उत्पादन केंद्रों और बिक्री केंद्रों की जांच में भी अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बिना लाइसेंस बिक्री और भ्रामक विज्ञापनों पर एक्शन
विभागीय जांच के दौरान बाजार में कई तरह की गंभीर अनियमितताएं प्रकाश में आईं। जून से सितंबर के बीच बिना वैध लाइसेंस के दवाओं का भंडारण और उनकी खुली बिक्री करने से जुड़े 43 मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की गई। इसके अलावा, औषधि एवं जादुई उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के प्रावधानों का उल्लंघन कर जनता को भ्रमित करने वाले विज्ञापनों से संबंधित 31 प्रकरण दर्ज किए गए। एफडीए की टीमों ने नकली दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों (कॉस्मेटिक्स) से जुड़े 14 मामलों में भी अपनी कार्रवाई को अंजाम दिया, जबकि गलत सूचना या अनुचित लेबलिंग वाले सौंदर्य प्रसाधनों के 10 अलग मामले भी सामने आए।
चिकित्सा उपकरण और लेबलिंग नियमों की निगरानी
एफडीए की इन व्यापक छापों और निरीक्षणों के दौरान अन्य कई विधिक और नियामकीय उल्लंघन भी उजागर हुए हैं। इनमें स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) के तहत दर्ज 9 मामले, चिकित्सा उपकरणों के व्यापार से जुड़े 3 मामले, भ्रामक रूप से मिलते-जुलते ब्रांड नामों के इस्तेमाल के 3 मामले और उत्पादों पर लेबलिंग नियमों के उल्लंघन से जुड़े 2 मामले प्रमुख रूप से शामिल हैं।
दवाओं की गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा सर्वोपरि
महाराष्ट्र एफडीए की इस आक्रामक कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बाजार में मरीजों और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली दवाओं की उच्च गुणवत्ता को बरकरार रखना, बिना अनुमति या अवैध रूप से चल रहे दवा कारोबार पर रोक लगाना और आम नागरिकों की सेहत की मुकम्मल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विभाग द्वारा इतनी बड़ी संख्या में किए गए निरीक्षणों और ताबड़तोड़ लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि दवा निर्माण और वितरण के क्षेत्र में अब नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य हो चुका है। वहीं, आम उपभोक्ताओं के लिए भी यह बेहद जरूरी है कि वे हमेशा अधिकृत और भरोसेमंद मेडिकल स्टोरों से ही दवाएं खरीदें तथा उनकी पैकेजिंग, एक्सपायरी डेट और लेबल की अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें।


