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    खेती में महिलाओं की ताकत, आधुनिक तकनीकों से आत्मनिर्भरता की राह

    रामगढ़ में 54 महिला किसानों और कृषि सखियों ने लिया प्रशिक्षण, डिजिटल जानकारी, जल संरक्षण और पोषण वाटिका पर मिला मार्गदर्शन

    रामगढ़। महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, डिजिटल नवाचारों और कृषि आधारित उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), नौगांवा (अलवर-1) की ओर से रामगढ़ में महिला किसान दिवस पर जागरूकता एवं क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें क्षेत्र की 54 महिला किसानों और कृषि सखियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण, पोषण सुरक्षा, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और डिजिटल माध्यमों से कृषि संबंधी जानकारी प्राप्त करने के तरीकों पर चर्चा की गई।

    कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं की कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानने के साथ उन्हें अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर और खेती से जुड़े निर्णय लेने में सशक्त बनाना रहा।

    वैज्ञानिक खेती से मजबूत होगी महिलाओं की भूमिका

    कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एस.सी. यादव ने कहा कि कृषि के सतत विकास में महिलाओं का ज्ञान, कौशल और सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है। महिला किसानों को नवीन कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक सलाह और प्रशिक्षण के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे खेती की लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के उपाय अपना सकें।

    उन्होंने महिला किसानों से कृषि विज्ञान केंद्र से निरंतर जुड़कर प्रशिक्षण, प्रदर्शन इकाइयों और वैज्ञानिक परामर्श का लाभ लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित महिला किसान अपने परिवार की कृषि व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं।

    रबी फसलों और जल संरक्षण पर मार्गदर्शन

    केंद्र के सस्य वैज्ञानिक डॉ. एच.आर. माली ने रबी फसलों के बेहतर प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों के चयन, संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य और सिंचाई जल के कुशल प्रबंधन पर विस्तार से समझाया।

    उन्होंने बताया कि जल और अन्य कृषि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने से उत्पादन लागत नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। महिला किसानों को खेत की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने, अनावश्यक उर्वरकों के उपयोग से बचने और जल संरक्षण की उपयुक्त विधियां अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

    डिजिटल कृषि और पोषण वाटिका पर विशेष जोर

    कार्यक्रम का संचालन केंद्र की प्रसार शिक्षा वैज्ञानिक डॉ. पूनम प्रजापति ने किया। उन्होंने बताया कि खेती में सफलता केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन, उचित पैकेजिंग, विपणन और परिवार की पोषण सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हैं।

    उन्होंने कृषि उत्पादों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण और बेहतर पैकेजिंग के माध्यम से महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित करने की जानकारी दी। साथ ही घर या खेत के आसपास पोषण वाटिका तैयार करने के लाभ बताए। इससे परिवार को ताजी और मौसमी सब्जियां उपलब्ध हो सकती हैं तथा बाजार से सब्जियां खरीदने पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है।

    ‘भारत विस्तार’ और ‘किसान सारथी’ की जानकारी

    महिला किसानों को डिजिटल कृषि से जोड़ने के लिए डॉ. पूनम प्रजापति ने ‘भारत विस्तार’ और ‘किसान सारथी’ जैसे डिजिटल माध्यमों एवं मोबाइल अनुप्रयोगों के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इनके माध्यम से कृषि संबंधी जानकारी, वैज्ञानिक सलाह और उपयोगी सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।

    उन्होंने मोबाइल पर मिलने वाली कृषि संबंधी सूचनाओं की विश्वसनीयता जांचने और व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रखने की सलाह भी दी। कृषि सखियों की भूमिका पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वे गांवों में नई जानकारी दूसरी महिला किसानों तक पहुंचाने और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    योजनाओं और आजीविका के अवसरों पर चर्चा

    कार्यक्रम में सरकारी योजनाओं, स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों, वित्तीय जागरूकता और आजीविका से जुड़े अवसरों की जानकारी भी साझा की गई। महिला किसानों और कृषि सखियों ने आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई। कृषि सखियों ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में सहयोग देकर सामूहिक सहभागिता और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया।

    इस दौरान राजीविका की क्लस्टर मैनेजर निशा चोला और रामगढ़ के उड़ान क्लस्टर से तिजेंद्र का सहयोग रहा।

    ज्ञान और आत्मविश्वास से सशक्त होंगी महिला किसान

    महिला किसान दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने खेती में महिलाओं के योगदान के साथ उन्हें वैज्ञानिक ज्ञान, डिजिटल साक्षरता, उद्यमिता और नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत को रेखांकित किया। कृषि विज्ञान केंद्र नौगांवा का प्रयास है कि महिला किसान वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाकर उत्पादन क्षमता बढ़ाएं, संसाधनों का बेहतर उपयोग करें और कृषि आधारित आय के नए अवसर तलाशें।

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