नेता प्रतिपक्ष ने सड़क से सत्ता तक संघर्ष का दिया संदेश, बोले—संविधान से ऊपर कोई नहीं, न्याय मिलने तक जारी रहेगी लड़ाई
जयपुर। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने रितु बराला मुद्दे पर सीधे सरकार और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े करते हुए मोर्चाबंदी की और पुलिस कमिश्नरेट पर प्रदर्शन में शामिल हुए। उनके नेतृत्व में अलवर से बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता जयपुर पहुंचे और रितु बराला को न्याय दिलाने की मांग के समर्थन में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
जूली ने इस मामले को केवल एक शिकायत पर FIR दर्ज होने या नहीं होने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे कानून के समान अनुपालन, महिलाओं की सुरक्षा और सत्ता के समक्ष प्रशासनिक निष्पक्षता के सवाल से जोड़ा। उनका स्पष्ट संदेश रहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था के दावे करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि हर नागरिक की शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
जूली का सीधा सवाल—जब कानून समान है, तो कार्रवाई में देरी क्यों
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि दिल्ली में रितु बराला के साथ कथित मारपीट के मामले में FIR दर्ज कराने के लिए कांग्रेस को प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
जूली ने भाजपा सरकार से सवाल किया कि यदि कानून सभी नागरिकों के लिए समान है, तो शिकायत पर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को किसी भी राजनीतिक दबाव या प्रभाव से मुक्त होकर कानून के अनुसार काम करना चाहिए। यदि नियमों की अनदेखी हुई है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
जूली ने कहा कि कानून के शासन की परीक्षा राजनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई से होती है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि FIR दर्ज करने में देरी की वजह क्या है और मामले में नियमानुसार कार्रवाई कब होगी।
विधानसभा में सरकार को घेरने वाले नेता प्रतिपक्ष के तौर पर जूली ने इस प्रकरण को जनता के अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़ते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
भाजपा सरकार के सामने जवाबदेही की चुनौती
जूली ने कहा कि कानून किसी सरकार, पार्टी या पदाधिकारी की सुविधा के हिसाब से नहीं चल सकता। यदि किसी नागरिक की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती, तो पुलिस प्रशासन को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि मामले में नियमानुसार FIR दर्ज हो, निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या दुर्व्यवहार सामने आता है, तो उचित कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नागरिकों को न्याय पाने के लिए राजनीतिक पहुंच का सहारा लेने की नौबत क्यों आनी चाहिए। उनके अनुसार, प्रशासनिक व्यवस्था में विश्वास तभी मजबूत होगा, जब शिकायतकर्ता को निष्पक्ष सुनवाई और कानून के अनुरूप कार्रवाई का भरोसा मिले।
संविधान का हवाला, सरकार से जवाब मांगने का स्पष्ट संदेश
जूली ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों और संवैधानिक व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि संविधान से ऊपर कोई नहीं है। पुलिस अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे बिना भेदभाव और दबाव के कानून का पालन करें। किसी भी मामले में कार्रवाई को लेकर सवाल उठाना और जवाबदेही की मांग करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि रितु बराला का मामला महिलाओं की सुरक्षा, नागरिक अधिकारों और पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता से जुड़ा है। कांग्रेस की मांग है कि शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाए जाएं।
अलवर से जयपुर तक कांग्रेस की लामबंदी, जूली के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं का कूच
रितु बराला को न्याय दिलाने की मांग को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में अलवर से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता जयपुर पहुंचे। इस दौरान जिलाध्यक्ष प्रकाश गंगावत, बलराम यादव, नरेंद्र सावित्री मीणा, महेश गुप्ता, हिम्मत चौधरी, महेश सैनी, उमरद्दीन खान, डॉ. तस्लीम, राहुल पटेल, साजिद खान, अनिल सैनी, राहुल खान, महेंद्र राठी और सोनू मीणा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
अलवर से जयपुर तक कार्यकर्ताओं की इस लामबंदी के जरिए कांग्रेस ने मामले को लेकर अपनी सामूहिक मांग सामने रखी। जूली ने संकेत दिया कि जब तक मामले में नियमानुसार कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कदम नहीं उठते, तब तक पार्टी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी।
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