मुंबई। महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति और किसानों की आर्थिक तंगी के बीच राज्य सरकार ने किसानों के विदेशी अध्ययन दौरे के लिए चार करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है, जिसके तहत 180 किसानों को विदेश भेजकर आधुनिक खेती और कृषि तकनीक की जानकारी दी जाएगी।
किसानों के विदेश दौरों के लिए चार करोड़ रुपये मंजूर
कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान किसानों के विदेश अध्ययन दौरे से जुड़ी इस योजना को प्रशासनिक स्वीकृति दी है। इसके तहत राज्य के 34 जिलों में से प्रत्येक जिले से पाँच-पाँच किसानों का चयन किया जाएगा, जिससे कुल 170 किसान इस सूची में आएंगे। इसके अतिरिक्त, राज्यस्तरीय समिति के माध्यम से दस और किसानों का चयन किया जाएगा, जिससे विदेश जाने वाले कुल किसानों की संख्या 180 हो जाएगी। इन किसानों के साथ मार्गदर्शन के लिए नौ अधिकारियों को भी भेजा जाएगा।
आधुनिक कृषि तकनीक सीखने का है उद्देश्य
शासन के आदेश के मुताबिक, इस दौरे का मुख्य उद्देश्य किसानों को विदेशों में चल रही आधुनिक खेती की पद्धतियों, उन्नत तकनीकों, कृषि उत्पादों के निर्यात, बिक्री और प्रोसेसिंग उद्योगों की बारीकियों से अवगत कराना है, ताकि वे उन तौर-तरीकों को अपने यहाँ अपना सकें।
सूखे के संकट के बीच सरकार के फैसले पर उठे सवाल
एक तरफ जहाँ राज्य के 358 में से 305 तालुका भीषण सूखे की चपेट में हैं, वहीं दूसरी तरफ इस योजना को लेकर आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्ष और विभिन्न किसान संगठनों का आरोप है कि भीषण सूखे और संकट के समय राहत कार्यों पर धन खर्च करने के बजाय विदेश दौरों पर चार करोड़ रुपये लुटाना गलत है। आलोचकों का यह भी कहना है कि सरकार किसानों की वास्तविक समस्याओं को सुलझाने के नाम पर कृषि विभाग के अधिकारियों को विदेश भेजने की जल्दी में है।


