रात में किसानों के प्रवेश को लेकर हुआ विवाद, किसान महापंचायत ने उठाए मंडी प्रशासन की जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
बारां। कृषि उपज मंडी में 21 अक्टूबर 2026 की रात मंडी में प्रवेश को लेकर विवाद के दौरान सुरक्षा गार्डों पर निहत्थे किसानों के साथ लाठियों से मारपीट करने के आरोप लगे हैं। किसान महापंचायत की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, घटना में छह किसान घायल हुए, जिनमें सुरेश मीणा को उपचार के लिए चिकित्सालय ले जाना पड़ा। इस घटना ने मंडी में किसानों की सुरक्षा, प्रवेश व्यवस्था और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसान महापंचायत के राजस्थान संयोजक सत्यनारायण सिंह ने घटना पर नाराजगी जताते हुए मंडी प्रशासन के विरुद्ध कार्रवाई और दोषियों को दंडित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि अपनी उपज बेचने के लिए मंडी आने वाले किसानों के साथ इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है। संगठन ने पीड़ित किसानों के साथ खड़े होकर मामले में न्यायोचित कार्रवाई के लिए ज्ञापन सौंपा और प्रदेश के किसानों से एकजुट होने का आह्वान किया।
मंडी में प्रवेश व्यवस्था पर उठे सवाल
किसान महापंचायत की ओर से आरोप लगाया गया है कि बारां मंडी में किसानों को अपनी कृषि उपज लेकर रात करीब 10 बजे से 12 बजे के बाद प्रवेश दिया जाता है। संगठन का कहना है कि किसानों की उपज की खरीद-बिक्री और उन्हें उचित दाम दिलाने के उद्देश्य से संचालित मंडियों में किसानों को सुविधाजनक प्रवेश मिलना चाहिए। प्रवेश को लेकर ऐसी व्यवस्था और विवाद की स्थिति किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
संगठन के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात प्रवेश को लेकर हुए विवाद में सुरक्षा गार्डों ने लाठियों से किसानों पर हमला किया। घटना में छह किसानों के घायल होने की बात कही गई है। किसान महापंचायत ने मंडी प्रशासन को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
मंडी शुल्क से किसानों को सुविधाएं देने की अवधारणा
किसान महापंचायत ने अपने पक्ष में कृषि उपज मंडियों की स्थापना और मंडी शुल्क की व्यवस्था का उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार, किसानों को व्यापारियों के शोषण से बचाने और कृषि उपज के व्यवस्थित विपणन के लिए मंडी कानून बनाए गए। राजस्थान में वर्ष 1961 में राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम तथा वर्ष 1963 में इसके क्रियान्वयन के नियम अस्तित्व में आए।
संगठन का कहना है कि मंडियों में कृषि उपज खरीदने वाले व्यापारियों से मंडी शुल्क लिया जाता है, जिसका उद्देश्य मंडी व्यवस्था के संचालन और किसानों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़ा है। किसान महापंचायत ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में मंडी शुल्क से 686.97 करोड़ रुपये संग्रहित होने का आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए सवाल उठाया है कि मंडियों से प्राप्त राशि का उपयोग किसानों की सुरक्षा और सुविधाओं को बेहतर बनाने में पर्याप्त रूप से क्यों नहीं हो रहा है।
शुल्क के उपयोग और किसानों की सुरक्षा पर सवाल
किसान महापंचायत ने आरोप लगाया कि मंडी शुल्क से संग्रहित राशि का उपयोग किसानों की सुविधाओं के बजाय ऐसे कार्यों में भी किया जा रहा है, जिनकी जिम्मेदारी सरकार की है। संगठन ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य सरकार के अंशदान के भुगतान का उदाहरण देते हुए इस राशि के उपयोग पर सवाल उठाए हैं।
संगठन का तर्क है कि यदि मंडी शुल्क से प्राप्त राशि का पर्याप्त उपयोग मंडियों में सुरक्षा, प्रवेश व्यवस्था और किसानों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में किया जाता, तो ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती थी। इन आरोपों और वित्तीय दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
सरकार से कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग
किसान महापंचायत के राजस्थान संयोजक सत्यनारायण सिंह ने पीड़ित किसानों के साथ खड़े होकर मामले में न्यायोचित कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने मंडी प्रशासन की जिम्मेदारी तय करने, कथित मारपीट में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई कराने और किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
किसान महापंचायत का कहना है कि कृषि विपणन व्यवस्था के अंतर्गत संचालित मंडियों में किसानों को सम्मानजनक व्यवहार, सुरक्षित प्रवेश और अपनी उपज बेचने के लिए उचित वातावरण मिलना चाहिए। संगठन ने सरकार से इस घटना से सबक लेते हुए स्पष्ट व्यवस्था बनाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

