जिंदगी में व्यक्ति का मिजाज बदलने से बढ़ जाती अपनों से दूरियां, आचार्य पुलकसागर ससंघ के सानिध्य में सूर्यमहल में मंगल दिव्य देशना जारी
भीलवाड़ा। जिंदगी में जिन रिश्तों में शर्ते आ जाती है वहां प्यार खत्म हो जाता है, मिलन नहीं होता बल्कि बहसबाजी होती है ओर समझाने वाले भी हार जाते है। शर्तों से बंधा रिश्ता तलाक की तरफ ले जाता ओर जहां तलाक हो जाता वहां सुख चैन समाप्त हो जाता है। शर्ते ओर अपेक्षा कभी सुलह नहीं होने देती वह कलह की ओर ले जाती है। जो हुआ उसे जाने दो की सोच ही सुलह का मार्ग खोलती है।
ये विचार श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ने शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में रविवार को अंतिम चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला ‘‘जीवन जीने की कला’’ पर मंगल दिव्य देशना के पांचवे दिन व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संचित कर्मो को नष्ट करने पर ही कषायों से मुक्ति मिलेगी ओर प्रेम भाव जागृत होगा। जैसे हम पुराने कलेण्डर को फेंक देते है वैसे ही पुरानी बातों को दिल से निकाल फेंकना होगा। पुरानी बातों को डिलीट करके जीना सीख लो जीवन सुखी हो जाएगा।
आचार्यश्री ने कहा कि जो पल हमे मिल रहे है उन्हें आनंद के साथ जीने को ही धर्म कहते है। ये पल ओर शरीर हमे दुबारा प्राप्त नहीं होने वाला है। माता-पिता की टोकाटोकी से कभी उन्हें दुश्मन नहीं माने वह फिर नहीं मिलने वाले है ओर उनके जाने के बाद कोई नहीं पूछेगा कि तुम अब तक कहां थे। पुरानी कड़वी बातों को याद रख जिंदगी को नरक मत बनाओ। कषायों से मुक्ति पाए बिना मोक्ष नहीं मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि कषायों को मिटाकर मन को निर्मल व पावन बनाए। कषायों के साथ क्रोध करने से दूरियां बढ़ती है।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जीवन में अपने व्यवहार ओर मिजाज को मेंटन रखना सीख गए तो जिंदगी सुखमय बनी रहेगी। सब कुछ वहीं होता पर जैसे ही हमारा बर्ताव बदलता है जिंदगी प्रेम से नफरत में बदलना शुरू हो जाती है। हमारे रवैये के कारण ही निकटता एवं दूरियां आती है। इंसान वहीं होता है लेकिन उसका मिजाज बदलने से दूरियां बढ़ने लगती है। हम जो पहले था वैसा ही बनाकर रखना है।
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य में जो आनंद पहली बार आता है वह फिर बाद में कम होता जाता है। समय के साथ जब एक्शन चेंज होता है तो रिएक्शन भी चेंज होता है। जिंदगी सुखी बनानी है तो हर मुलाकात को पहली मुलाकात समझो ओर हर रात को आखिरी रात समझो। अपना मिजाज मेंटन कर लेंगे तो जिंदगी से प्यार कभी समाप्त नहीं होगा।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि प्रवचन के शुरू में पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य राजेन्द्र, रोहित, सम्यक बाकलीवाल परिवार ने प्राप्त किया। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।
चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि 30 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 8.45 से 10 बजे तक आचार्यश्री के मुखारबिंद से दिव्य देशना प्राप्त होगी। इस दौरान प्रतिदिन शाम 6.30 से 7.30 बजे तक आनंद यात्रा (प्रश्न मंच) का आयोजन हो रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।
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