नागपुर। राजे भोसले की संपत्ति पर कब्जे को लेकर चल रहे विवाद में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ से याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत मिली है। अधीनस्थ न्यायालय द्वारा विभिन्न आपत्तियों को खारिज किए जाने के खिलाफ सिद्धार्थ ढंगरे एवं अन्य ने रिट याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति नंदेश देशपांडे ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है और कोर्ट के अगले आदेश तक उनके शांतिपूर्ण कब्जे में किसी भी तरह का खलल न डालने का निर्देश दिया है।
रानी कमलराजे भोसले की वंशावली और मालिकाना हक पर विवाद
अदालत में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद जायसवाल ने दलील दी कि निचली अदालत द्वारा आपत्तियों को खारिज करने का आदेश कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता रानी कमलराजे भोसले की वंशावली के माध्यम से अपने अधिकारों का दावा कर रहे हैं। इसके अलावा विवादित संपत्ति की पहचान को लेकर भी गंभीर संशय है। वकील ने कोर्ट को अवगत कराया कि संपत्ति पर याचिकाकर्ताओं का वैध मालिकाना हक और भौतिक कब्जा लगातार बना हुआ है, इसलिए उनके शांतिपूर्ण कब्जे को सुरक्षा दी जाए।
प्रतिवादियों को नोटिस जारी, 28 अक्टूबर तक मांगा जवाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति नंदेश देशपांडे ने प्रतिवादी राजे रघुजीराव अजीत सिंह भोसले (पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर वासुदेव एस. अग्रवाल के जरिए) और अन्य को नोटिस जारी कर 28 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सभी उपलब्ध माध्यमों से नोटिस की तामीली कराने और निर्धारित तिथि से पहले तामीली का हलफनामा (अफेडेविट) पेश करने की अनुमति दी है।
अंतिम मालिकाना हक पर फैसला अभी बाकी
हाई कोर्ट का यह अंतरिम आदेश संपत्ति पर मौजूदा कब्जे को सुरक्षित रखने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस आदेश के बाद मामले के अंतिम फैसले तक संपत्ति की यथास्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अंतरिम राहत को संपत्ति के अंतिम मालिकाना हक या स्वामित्व पर निर्णय नहीं माना जा सकता। अब प्रतिवादियों के जवाब और दोनों पक्षों की अंतिम दलीलों के आधार पर आगे की कानूनी दिशा तय होगी।


