More
    Homeराजस्थानकोटापद्मश्री के बावजूद श्यामसुंदर को मिली हार, पिपलांत्री में नवीन की जीत...

    पद्मश्री के बावजूद श्यामसुंदर को मिली हार, पिपलांत्री में नवीन की जीत की चर्चा

    राजसमंद। राजस्थान के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान राजसमंद जिले के चर्चित पिपलांत्री गांव में एक बड़ा और चौंकाने वाला राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। यहां मात्र 28 वर्ष के युवा नवीन पालीवाल ने पद्मश्री सम्मान से अलंकृत पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल को चुनावी मैदान में शिकस्त दे दी है। नवीन ने कुल 1,348 मत प्राप्त करते हुए 492 वोटों के भारी अंतर से यह जीत हासिल की है। इस चुनाव के दौरान नवीन पालीवाल ने स्थानीय राजनीति में जड़ें जमा चुके परिवारवाद को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया तथा डिजिटल माध्यमों व सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग कर युवा वर्ग को अपने पक्ष में एकजुट किया। दूसरी ओर, चुनाव परिणामों के पश्चात श्यामसुंदर पालीवाल ने पराजय स्वीकार करते हुए पारंपरिक चुनाव प्रचार शैली और ग्रामीणों के भीतर उपजी कुछ नाराजगी को अपनी हार के कारणों में रेखांकित किया है।

    परिवारवाद के विरुद्ध मुखर आवाज और सोशल मीडिया का प्रभाव

    पिपलांत्री पंचायत में पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल और उनकी धर्मपत्नी अनिता पालीवाल क्रमिक रूप से दो बार सरपंच के पद पर आसीन रह चुके हैं, तथा वर्तमान में अनिता पालीवाल राजसमंद नगर परिषद के सभापति का दायित्व संभाल रही हैं। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि को आधार बनाते हुए युवा प्रत्याशी नवीन पालीवाल ने अपने प्रचार अभियान में परिवारवाद के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए घर-घर तक अपनी बात पहुंचाई और युवा पीढ़ी का भरपूर समर्थन प्राप्त किया। इसके विपरीत, श्यामसुंदर पालीवाल ने स्वीकार किया कि उन्होंने परंपरागत तरीकों से प्रचार किया था, जबकि उनके प्रतिद्वंदी ने आधुनिक तकनीक का लाभ उठाया। उन्होंने यह भी माना कि उनकी पत्नी के नगर परिषद सभापति बनने के बाद स्थानीय जनता में कुछ असंतोष था, जिसे वे समय रहते भांप नहीं सके।

    बेटी की स्मृति से जन्मी विश्वप्रसिद्ध पर्यावरण संरक्षण मुहिम

    श्यामसुंदर पालीवाल की ख्याति केवल एक राजनीतिक चेहरे के रूप में नहीं, अपितु पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उनके ऐतिहासिक एवं अनुकरणीय कार्यों के कारण संपूर्ण देश में रही है। वर्ष 2006 में अपनी पुत्री किरण के असामयिक निधन के बाद उन्होंने गांव में एक अनूठी पहल की शुरुआत की, जिसके तहत किसी भी बालिका के जन्म पर 111 पौधे रोपित किए जाते हैं। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य कन्या जन्म को एक उत्सव का रूप देना और हरित आवरण को बढ़ावा देना है। इस अनूठी योजना के अंतर्गत नवजात बालिका के उज्ज्वल भविष्य की सुरक्षा के लिए 31,000 रुपये की सावधि जमा (एफडी) भी कराई जाती है, जिसमें 21 हजार रुपये ग्रामीणों के स्वैच्छिक सहयोग से और 10 हजार रुपये बालिका के माता-पिता द्वारा जुटाए जाते हैं।

    बाल विवाह पर प्रभावी रोक और बेटियों की शिक्षा पर विशेष जोर

    पिपलांत्री की यह प्रेरणादायी पहल केवल पौधारोपण तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इसके दायरे में सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन भी शामिल है। पंचायत प्रशासन द्वारा बालिका के अभिभावकों से यह कानूनी शपथ पत्र लिया जाता है कि वे अपनी पुत्री का बाल विवाह नहीं करेंगे और उसे उच्च शिक्षा दिलाएंगे। इस प्रकार इस ग्राम पंचायत ने नारी सशक्तिकरण, बालिका सुरक्षा और पर्यावरण चेतना का एक अनूठा मॉडल प्रस्तुत किया है। इस पर्यावरण संरक्षण अभियान के परिणामस्वरूप अब तक पिपलांत्री और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगभग तीन लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। समाजसेवा और पर्यावरण के क्षेत्र में उनके इन्हीं विशिष्ट योगदानों के मद्देनजर वर्ष 2021 में श्यामसुंदर पालीवाल को देश के प्रतिष्ठित 'पद्मश्री' सम्मान से नवाजा गया था। हालांकि, मौजूदा पंचायत चुनाव में युवा ऊर्जा और पीढ़ीगत बदलाव की लहर के चलते उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा है, जिसने ग्रामीण राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दिया है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here