जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के सचिव को शहर की एक पंजीकृत आवासीय कॉलोनी में पिछले दो दशकों से पक्की सड़क, सीवरेज तथा अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न कराने और विकास कार्यों की समय-सीमा स्पष्ट न किए जाने को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने यह आदेश कोर्टविहार क्षेत्र स्थित विनायक रेजीडेंसी सोसायटी के निवासियों की ओर से दायर की गई रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है। स्थानीय नागरिक हीरालाल गोठवाल के माध्यम से दाखिल की गई इस याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आनंद शर्मा की एकलपीठ ने जेडीए सचिव से व्यक्तिगत शपथ पत्र तलब किया है।
मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं क्षेत्र के दो सौ परिवार
अदालत में याचिकाकर्ताओं का पक्ष प्रस्तुत करते हुए अधिवक्ता विजय पाठक ने बताया कि प्रार्थी सहित लगभग 200 परिवारों ने वर्ष 2005 में जयपुर विकास प्राधिकरण से विधिवत नियमित किए गए ब्लॉक 61 से 67 के अंतर्गत अपने आवासीय भवन और फ्लैट क्रय किए थे। इस नियमितीकरण को लगभग बीस वर्ष बीत चुके हैं, किंतु विडंबना यह है कि स्थानीय निवासियों को आज तक पक्की सड़कों, सीवरेज लाइन, जल निकासी और स्ट्रीट लाइट जैसी प्राथमिक नागरिक सुविधाएं मयस्सर नहीं हो पाई हैं, जिसके कारण यहां के वासी मूलभूत सुविधाओं के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।
जलभराव और गंदगी से उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं
याचिका में इस बात पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है कि क्षेत्र में उचित नालियों और सीवरेज प्रणाली का अभाव होने के कारण मानसून के मौसम में वर्षा का सारा गंदा पानी बहकर सीधे आवासीय परिसरों में भर जाता है। इसके परिणामस्वरूप पूरे मोहल्ले में गंभीर जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है और निवासियों का घर से बाहर निकलना भी दूभर हो जाता है। सीवरेज टैंकों के ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बहने के कारण संपूर्ण क्षेत्र में भारी गंदगी और कीचड़ का साम्राज्य फैल जाता है, जिससे क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों के फैलने का निरंतर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।


