मुंबई। बॉलीवुड के प्रसिद्ध एवं वरिष्ठ अभिनेता अन्नू कपूर ने अनुभवी अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की हालिया विवादित 'दिमागी नक्सल' वाली टिप्पणी पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अन्नू कपूर ने देश के व्यापक हितों और राष्ट्रीय कल्याण को लेकर शाह की वैचारिक समझ पर सीधे सवाल खड़े किए हैं, यद्यपि इसके साथ ही उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करने और विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार का समर्थन भी किया है।
नसीरुद्दीन शाह की समझ पर अन्नू कपूर ने उठाए सवाल
अन्नू कपूर ने एक साक्षात्कार के दौरान अपनी बात रखते हुए कहा कि भले ही नसीरुद्दीन शाह संवाद अदायगी में बेहद निपुण हों, परंतु इस बात पर गहरा संदेह है कि वे वास्तव में राष्ट्र के कल्याण और हित के विषय में कितनी संजीदगी से सोचते हैं। उन्होंने इस प्रकार की बयानबाजी करने वालों पर अपनी कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह हमारे देश का महान लोकतंत्र ही है जो ऐसे लोगों को खुलकर अपनी बात रखने, बयान देने और विरोध प्रदर्शन करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। अन्नू कपूर ने पूर्व में भी अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा था कि शांतिपूर्ण ढंग से असहमति प्रकट करना लोकतांत्रिक अधिकार है, किंतु हिंसा फैलाना और सार्वजनिक परिसंपत्तियों को क्षति पहुंचाना कदापि स्वीकार्य नहीं हो सकता।
अशोक पंडित का तीखा हमला और मानसिक स्थिति पर टिप्पणी
दूसरी ओर, जाने-माने फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने भी नसीरुद्दीन शाह के आचरण की कठोर शब्दों में आलोचना की है। अशोक पंडित ने कहा कि वे शाह की अभद्र भाषा और व्यवहार से बिल्कुल भी आश्चर्यचकित नहीं हैं, क्योंकि पिछले कई महीनों से उनका आचरण लगातार अमर्यादित होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कैमरे के सामने शाह का हताश चेहरा और अनुचित भाषा उनकी अंतर्निहित निराशा को दर्शाती है। पंडित ने आगे कहा कि देश में 'द कश्मीर फाइल्स', 'द केरल स्टोरी' और 'धुरंधर' जैसी यथार्थवादी फिल्मों की सफलता से उत्पन्न हीन भावना के कारण शायद वे इस प्रकार का व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को परामर्श देते हुए कहा कि उन्हें अपनी मानसिक सेहत के सुधार हेतु किसी कुशल मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
छात्र आंदोलनों के समर्थन और 'दिमागी नक्सल' विवाद का पूरा घटनाक्रम
अन्नू कपूर और अशोक पंडित का यह आक्रोश नसीरुद्दीन शाह द्वारा हाल ही में साझा किए गए एक वीडियो के बाद सामने आया है। उस वीडियो में शाह ने 'दिमागी नक्सल' लिखा हुआ एक बैज धारण कर रखा था और इसके माध्यम से उन्होंने दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया के उन विद्यार्थियों का पक्ष लिया जो छात्र संघ की बहाली को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। वीडियो में शाह ने यह बयान दिया था कि वे गर्व से स्वयं को 'दिमागी नक्सल' मानते हैं और उन्हें इस बात की परवाह नहीं कि सत्ता पक्ष द्वारा उन्हें राष्ट्र-विरोधी या टुकड़े-टुकड़े गैंग जैसे क्या नाम दिए जाते हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय में नसीरुद्दीन शाह ने कोलकाता के एसआरएफटीआई सहित कई शैक्षणिक संस्थानों के छात्र प्रदर्शनों का सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार समर्थन किया है।


