पांच दीक्षार्थी बहनों की विदाई में विंटेज कारों और उदयपुर के बैंड ने बढ़ाई रौनक, 22 नवंबर को लेंगी जैन दीक्षा
बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल में जैन दीक्षा से पहले पांच दीक्षार्थी बहनों की भव्य बिनौली निकाली गई। इनमें प्रखर श्री दीदी भी शामिल हैं, जिन्होंने जज की परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति से पहले ही सांसारिक जीवन त्यागकर जैन दीक्षा का मार्ग चुन लिया। उनकी विदाई के लिए निकाले गए चल समारोह में विंटेज कारें, आकर्षक शाही बग्घियां और राजस्थान के उदयपुर से आया बैंड विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
बैतूल सकल जैन समाज के सहयोग से आयोजित इस बिनौली में बड़ी संख्या में समाजजन और श्रद्धालु शामिल हुए। शहर के विभिन्न मार्गों से निकले चल समारोह में पांचों दीक्षार्थी बहनों का जगह-जगह फूल-मालाओं और जयकारों के साथ स्वागत किया गया। परिवारजनों और समाज के लोगों ने भावुक माहौल में उन्हें विदाई दी।
जज बनने का सपना पूरा किया, फिर चुना वैराग्य का मार्ग
प्रखर श्री दीदी ने बताया कि उनके माता-पिता की इच्छा थी कि वह जज की परीक्षा पास करें। उन्होंने मेहनत कर यह सपना पूरा किया, लेकिन बचपन से ही उनके मन में वैराग्य का भाव रहा। उनका कहना है कि जज या वकील बनकर वह समाज की जितनी सेवा कर सकती थीं, उससे अधिक सेवा महावीर के बताए मार्ग पर चलकर करना चाहती हैं। इसी भावना से उन्होंने जैन दीक्षा लेने का निर्णय किया।
विंटेज कारों और शाही बग्घियों के साथ निकली बिनौली
पांचों दीक्षार्थी बहनों की बिनौली को भव्य स्वरूप दिया गया। इसमें विंटेज कारों का काफिला, सजी हुई शाही बग्घियां और उदयपुर से आया बैंड शामिल रहा। भक्ति गीतों और जयकारों के बीच निकले इस चल समारोह को देखने के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर लोग जुटे। श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर और मालाएं पहनाकर दीक्षार्थियों का अभिनंदन किया।
चल समारोह शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ जैन दादावाड़ी पहुंचा। यहां पांचों दीक्षार्थी बहनों की गोदभराई की पारंपरिक रस्म पूरी की गई। आयोजन के दौरान धार्मिक उत्साह के साथ परिवारों और समाजजनों के बीच भावुकता का माहौल भी देखने को मिला।
दीक्षा के बाद धारण करेंगी सफेद वस्त्र
दीक्षार्थी रंगोली दीदी ने बताया कि यह उनके सांसारिक जीवन की अंतिम विदाई का अवसर है। फिलहाल उन्होंने रंगीन वस्त्र धारण किए हैं, लेकिन जैन दीक्षा के बाद वे सफेद वस्त्र पहनेंगी। जानकारी के अनुसार, प्रखर श्री दीदी सहित पांचों बहनें 22 नवंबर को जैन दीक्षा ग्रहण करेंगी।
इससे पहले परिवार और सकल जैन समाज की ओर से उनके सम्मान में भव्य बिनौली आयोजित की गई। आयोजन के माध्यम से दीक्षार्थी बहनों को सांसारिक जीवन से विदाई देते हुए उनके संयम और आध्यात्मिक जीवन की नई यात्रा के लिए मंगलकामनाएं दी गईं।
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