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    सुपर अल नीनो से बदल रहा मौसम का मिजाज, लंदन में दिखा अनोखा असर

    लंदन। ब्रिटेन की राजधानी लंदन में मौसम के दो अलग-अलग और भयानक रूप एक साथ देखने को मिल रहे हैं, जहां गर्मी और ठंड दोनों अपनी चरम सीमाओं पर पहुंच गए हैं। एक तरफ, सुपर अल नीनो के प्रचंड प्रभाव से वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मौसम विज्ञानियों ने इस शीतकाल में पोलर वोर्टेक्स के कमजोर पड़ने के कारण लंदन में आर्कटिक जैसी भीषण ठंड पड़ने की चेतावनी जारी की है। यह असाधारण स्थिति जलवायु परिवर्तन के गहरे असंतुलन को दर्शाती है।

    सुपर अल नीनो का प्रकोप और बढ़ती मौतें

    प्रशांत महासागर के पानी के अत्यधिक गर्म होने की प्रक्रिया 'अल नीनो' इस बार 1950 के बाद के सबसे शक्तिशाली 'सुपर अल नीनो' रूप में उभरी है। इसके दुष्परिणाम स्वरूप वैश्विक तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। जून 2026 से फरवरी 2027 के मध्य दुनिया भर में भीषण गर्मी के कारण साढ़े चार लाख से अधिक लोगों की जान जाने की आशंका जताई गई है। यूनाइटेड किंगडम में ही मई और जून 2026 के दौरान भीषण गर्मी की वजह से लगभग 2,700 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई, जिनमें से अधिकांश मामलों का सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से था।

    पोलर वोर्टेक्स का कमजोर पड़ना और कड़ाके की ठंड

    लंदन में कड़ाके की ठंड का मुख्य कारण आर्कटिक क्षेत्र के ऊपर सक्रिय रहने वाले 'पोलर वोर्टेक्स' का कमजोर पड़ना है। सामान्य परिस्थितियों में यह ध्रुवीय भंवर बर्फीली हवाओं को उत्तरी ध्रुव तक ही सीमित रखता है। परंतु इसके कमजोर होने या बिखरने की स्थिति में यह अत्यधिक ठंडी हवाएं दक्षिण दिशा की ओर बहने लगती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार पोलर वोर्टेक्स के टूटने की संभावना अत्यंत अधिक है, जो ब्रिटेन के लिए एक गंभीर संकट बन सकता है।

    लंदन पर बढ़ता खतरा और सामाजिक-आर्थिक कारण

    विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, इंग्लैंड के अन्य क्षेत्रों की तुलना में लंदन के निवासियों को अत्यधिक गर्मी और ठंड दोनों से जान का सर्वाधिक जोखिम है। 1988 से 2025 के मध्य लंदन में गर्मी से जुड़ी मौतें 0.36 प्रतिशत और ठंड से जुड़ी मौतें 0.88 प्रतिशत दर्ज की गईं, जो पूरे देश में उच्चतम स्तर पर थीं। इसके पीछे उच्च जीवन-यापन लागत, घनी आबादी और पर्याप्त एयर कंडीशनिंग का न होना जैसे सामाजिक-आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं। मौसम विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि वर्ष 2027 अब तक का सबसे गर्म वर्ष सिद्ध हो सकता है।

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