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    NIA ने झारखंड में माओवादी पर की बड़ी कार्रवाई: राजेश देवगम के ठिकानों पर छापेमारी

    राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने झारखंड में माओवादी गतिविधियों पर नकेल कस दी है. पश्चिम सिंहभूम के राजेश देवगम के खिलाफ 3 जुलाई को रांची के विशेष NIA कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई है. राजेश पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन CPI (माओवादी) के लिए काम करने का आरोप है. NIA के मुताबिक, राजेश माओवादी कैडर को न सिर्फ छिपाने में मदद करता था, बल्कि हथियार जुटाने, जबरन वसूली (लेवी) और संगठन की बैठकों के आयोजन में भी शामिल था.

    यह मामला मार्च 2024 में सामने आया, जब चाईबासा जिले के टोंटो पुलिस स्टेशन में पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था. इस दौरान CPI (माओवादी) के वरिष्ठ नेता मिसिर बेसरा से जुड़ा भारी मात्रा में कैश और संदिग्ध सामान बरामद हुआ था. जुलाई 2024 में NIA ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी. राजेश देवगम की निशानदेही पर हुसिपी और राजाभासा गांव के बीच जंगल में छिपाए गए सामान की बरामदगी हुई थी. इसमें 10.50 लाख रुपये नकद, जेलटिन की छड़ें, वॉकी-टॉकी, सैमसंग टैबलेट, पावर बैंक, रेडियो सेट और लेवी वसूली की रसीदें शामिल थीं.

    राजेश माओवादी संगठन को लॉजिस्टिक और आर्थिक मदद पहुंचाता था: NIA

    NIA ने राजेश देवगम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की है. एजेंसी का कहना है कि राजेश माओवादी संगठन को लॉजिस्टिक और आर्थिक मदद पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा था. इसके अलावा NIA ने जनवरी में पश्चिम सिंहभूम के नौ स्थानों पर छापेमारी कर कई संदिग्धों और माओवादी समर्थकों के ठिकानों से मोबाइल फोन, मेमोरी कार्ड, सिम कार्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की थी. ये छापेमारी उसी केस के तहत की गई थीं, जिसमें राजेश की गिरफ्तारी हुई है.

    क्यों CPI (माओवादी) संगठन भारत में बैन है?

    CPI (माओवादी) देश में प्रतिबंधित संगठन है. जो झारखंड, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सबसे अधिक सक्रिय हैं. जो नक्सलियों को पनाह देने के लिए जाना जाता है. बता देें कि नक्सलियों का मुख्य मकसद भारत सरकार को उखाड़ फेंकना और एक कम्युनिस्ट राज्य स्थापित करना है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि नक्सलवाद को 31 मार्च 2026 तक पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा. NIA की यह कार्रवाई उसी दिशा में एक बड़ा कदम है.

    नक्सलवाद के खिलाफ NIA बड़ा एक्शन लेने को तैयार

    NIA ने बताया कि इस मामले में अन्य संदिग्धों और माओवादी समर्थकों की जांच अभी जारी है. जल्द ही मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. यह कार्रवाई नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. NIA की ताजा कार्रवाई से झारखंड में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. राजेश देवगम के खिलाफ चार्जशीट और जंगल से बरामद सामान इस बात का सबूत हैं कि माओवादी गतिविधियों को कमजोर करने के लिए जांच एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हैं.

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