तिजारा। सावन मास का पावन आरंभ होते ही तिजारा क्षेत्र में शिवभक्ति का उत्साह चरम पर पहुंच गया है। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। विशेषकर सोमवार को शिव मंदिरों में भक्तों की उपस्थिति और भी अधिक दिखाई दे रही है।
शिव मंदिरों में भक्ति और सजावट का वातावरण:
तिजारा स्थित शंकरगढ़ आश्रम, हनुमान बगीची मंदिर, और अन्य प्रमुख शिवालयों को विशेष रूप से सजाया गया है। मंदिरों में फूलों की आकर्षक सजावट, रंगीन लाइटों की व्यवस्था, और विशेष पूजा-अर्चना की श्रृंखला शुरू हो चुकी है। भजन-कीर्तन और रुद्राभिषेक जैसे धार्मिक आयोजनों के साथ वातावरण भक्तिमय हो गया है।
कांवड़ सेवा शिविरों की तैयारियाँ:
सावन मास में हर वर्ष की तरह इस बार भी कांवड़ यात्रियों की सेवा हेतु क्षेत्र में कांवड़ सेवा शिविरों की तैयारियाँ जोरों पर हैं। सार्वजनिक शंकरगढ़ आश्रम और हनुमान बगीची मंदिर समिति सहित अन्य सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा सेवा शिविरों की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इस क्रम में कई कांवड़ संघों की बैठकें आयोजित हुईं, जिनमें सेवा शिविरों में पानी, भोजन, विश्राम, चिकित्सा व सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए स्वयंसेवकों की टीम भी तैयार की जा रही है। संगठनों ने बताया कि शिविरों में आने वाले हर कांवड़ यात्री को समुचित सुविधा, प्रसाद वितरण, और चिकित्सकीय सहायता निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
जन सहभागिता और धार्मिक उत्सव का माहौल:
सावन की शुरुआत के साथ नगरवासियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्र पाठ, और विशेष भोग का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु सुबह-सुबह मंदिरों में पहुंचकर बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और गंगाजल से भगवान शिव का पूजन कर रहे हैं।
साथ ही, युवा वर्ग द्वारा कांवड़ यात्रा को लेकर खासा उत्साह है। कई समूहों ने हरिद्वार, ऋषिकेश और गंगोत्री से गंगाजल लाकर तिजारा व आसपास के शिवालयों में जलाभिषेक करने की योजना बनाई है। इन यात्राओं के लिए प्रशासन व स्थानीय समितियों द्वारा यातायात व सुरक्षा व्यवस्था को भी सुचारू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
धार्मिक और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक सावन:
सावन का महीना भक्ति, सेवा और संस्कारों का प्रतीक माना जाता है। यह महीना केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा और आपसी सहयोग की भावना को भी मजबूती प्रदान करता है। तिजारा में शिवभक्ति की यह लहर आने वाले दिनों में और भी अधिक तेज होगी, जब सावन के सोमवार, श्रावण पूर्णिमा, और महाशिवरात्रि जैसे पर्व मनाए जाएंगे।


