पुलिसकर्मी वीरेंद्र यादव की मौत से विभाग में शोक की लहर
किशनगढ़ बास (खैरथल-तिजारा)।
राजस्थान के नवगठित खैरथल-तिजारा जिले के किशनगढ़ बास थाना परिसर में शनिवार सुबह एक बेहद दुखद और दर्दनाक हादसा हो गया। थाने की तीसरी मंजिल की छत से गिरने के कारण पुलिसकर्मी वीरेंद्र यादव की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई और थाना परिसर में गमगीन माहौल बन गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिसकर्मी वीरेंद्र यादव शनिवार सुबह करीब 11:15 बजे थाना भवन की तीसरी मंजिल पर स्थित छत पर कपड़े सुखाने के लिए गए थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने से वे नीचे गिर पड़े। गिरने की आवाज सुनकर थाना परिसर में मौजूद अन्य पुलिसकर्मी मौके पर दौड़े और उन्हें तुरंत किशनगढ़ बास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
अस्पताल में प्राथमिक उपचार देने के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें अलवर रेफर कर दिया, लेकिन अलवर में इलाज के दौरान ही वीरेंद्र यादव ने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही थाना परिसर में मौजूद पुलिसकर्मी स्तब्ध रह गए। हर कोई इस असमय हुई दुर्घटना पर शोकाकुल नजर आया।
वीरेंद्र यादव, गांव ईसरोदा (थाना शेखपुर, जिला अलवर) निवासी थे। वे वर्षों से पुलिस विभाग में सेवा दे रहे थे और वर्तमान में किशनगढ़ बास थाने में तैनात थे। वीरेंद्र यादव के परिवार में पत्नी, एक बेटा और दो बेटियां हैं। वे अपने व्यवहार, कर्तव्यनिष्ठा और सौम्य स्वभाव के लिए सहकर्मियों में काफी लोकप्रिय थे।
इस हादसे के बाद पुलिस विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया गया। सहकर्मी पुलिसकर्मियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और दो मिनट का मौन रखकर शोक संवेदना व्यक्त की।
थाना परिसर में मौजूद पुलिसकर्मियों ने बताया कि वीरेंद्र यादव नियमित रूप से अपने कपड़े खुद धोते और छत पर सुखाने ले जाते थे। शनिवार सुबह भी वे रोज की तरह गए थे, लेकिन यह सुबह किसी को नहीं पता था कि इतना अकाल दुख लेकर आएगी।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी इस दुर्घटना पर गहरी संवेदना जताई है और सरकार से वीरेंद्र यादव के परिवार को आर्थिक सहायता और बच्चों के लिए भविष्य की सुरक्षा की मांग की है।
यह घटना न केवल एक ड्यूटी पर तैनात कर्मी की असमय मौत का मामला है, बल्कि यह इस ओर भी संकेत करती है कि सरकारी भवनों में सुरक्षा उपायों की गंभीरता से समीक्षा की जानी चाहिए। यदि छत पर रेलिंग या कोई सुरक्षा दीवार होती तो संभव है यह दुर्घटना टाली जा सकती थी।
वीरेंद्र यादव की यह आकस्मिक मृत्यु पुलिस विभाग के लिए एक गहरी क्षति है और उनके परिवार के लिए एक अपूरणीय शोक।