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    Homeस्वास्थ्यआयुर्वेद के अनुसार शहद के चमत्कारी फायदे, सेहत के लिए वरदान

    आयुर्वेद के अनुसार शहद के चमत्कारी फायदे, सेहत के लिए वरदान

    आयुर्वेद में शहद को अपनी विशेष प्रकृति के कारण एक 'जादुई औषधि' माना गया है। आमतौर पर गर्मियों में गर्म तासीर वाली चीजों से परहेज किया जाता है, क्योंकि वातावरण का ताप और शरीर का पित्त पहले से ही बढ़ा होता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या गर्मी के मौसम में शहद का सेवन सुरक्षित है? आयुर्वेद के अनुसार, शहद एक 'योगवाही द्रव्य' है, जिसका अर्थ है कि यह अपने साथ मिलाई जाने वाली वस्तु के गुणों को अपना लेता है। यदि इसे सही तरीके और सही मिश्रण के साथ लिया जाए, तो यह भीषण गर्मी में भी अमृत समान लाभकारी हो सकता है।

    शहद के सेवन की सही विधि और लाभ

    गर्मियों में शहद का सीधा सेवन या गर्म पानी के साथ इसका मेल शरीर में जलन और पित्त बढ़ा सकता है। हालांकि, निम्नलिखित तरीकों से इसका उपयोग ठंडक पहुँचाने वाला साबित होता है:

    • मिट्टी के घड़े का ठंडा पानी और नींबू: सुबह खाली पेट घड़े के ठंडे पानी में शहद और थोड़ा नींबू का रस मिलाकर पीने से शरीर 'हाइड्रेटेड' रहता है। यह न केवल शरीर को शीतलता प्रदान करता है, बल्कि वजन घटाने में भी सहायक है।

    • सत्तू के साथ मिश्रण: उत्तर भारत में सत्तू का सेवन गर्मियों में ऊर्जा के लिए किया जाता है। चीनी की जगह सत्तू में शहद मिलाना एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है। यह मांसपेशियों की थकान मिटाता है और लू से बचाता है।

    • दही और शहद का मेल: दोपहर के समय दही में शहद मिलाकर खाना एक बेहतरीन 'प्रोबायोटिक' आहार है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और शरीर की आंतरिक गर्मी को शांत करता है।

    सावधानियां और 'विरुद्ध आहार' का नियम

    शहद का लाभ तभी मिलता है जब इसके सेवन में आयुर्वेद के नियमों का पालन किया जाए। गर्मियों में शहद के उपयोग के दौरान इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

    • घी के साथ सेवन वर्जित: शहद और घी को कभी भी एक साथ नहीं लेना चाहिए। आयुर्वेद में इसे 'विरुद्ध आहार' माना गया है, जिसका अर्थ है कि यह संयोजन शरीर के लिए विषाक्त हो सकता है। इनका साथ में सेवन वात और पित्त के संतुलन को बिगाड़कर शरीर में अत्यधिक गर्मी पैदा करता है।

    • सीधा सेवन न करें: भीषण गर्मी में शहद को बिना किसी शीतल माध्यम (जैसे ठंडा पानी या दही) के लेने से बचें, अन्यथा यह पित्त दोष को बढ़ा सकता है।

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