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    साबू की कहानी है एक साधारण लड़के की असाधारण यात्रा

    मुंबई। लेखिका देबलीना मजूमदार की चर्चित जीवनी ‘साबू: द रिमार्केबल स्टोरी ऑफ इंडियाज फर्स्ट एक्टर इन हॉलीवुड’ के फिल्म और टेलीविजन अधिकार ऑलमाइटी मोशन पिक्चर्स ने हासिल कर लिए हैं। भारत के पहले हॉलीवुड अभिनेता साबू दस्तगीर की प्रेरणादायक कहानी अब बड़े पर्दे पर दिखाई जाएगी। साबू की यह कहानी एक ऐसे साधारण लड़के की असाधारण यात्रा है, जो मैसूर के हाथी पालन करने वाले परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के मंच तक पहुंचा। निर्माता और अभिनेत्री प्रभलीन संधू ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि साबू की कहानी को भव्यता और सच्चाई के साथ दर्शकों के सामने लाना एक जिम्मेदारी है।
    उनके अनुसार यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक विरासत को संभालने जैसा कार्य है जिसे दुनिया को जानना चाहिए। साबू का जन्म 1924 में ब्रिटिश भारत के मैसूर के करपुरा गांव में हुआ था। वह एक महावत के बेटे थे और हाथियों की देखभाल करने वाले परिवार से ताल्लुक रखते थे। लेकिन 13 साल की उम्र में उनके जीवन ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने उन्हें सीधे हॉलीवुड पहुंचा दिया। 1937 में आई फिल्म ‘एलिफेंट बॉय’ से उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। यह फिल्म रुडयार्ड किपलिंग की कहानी ‘टूमाई ऑफ द एलीफेंट्स’ पर आधारित थी और इसका निर्देशन डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर रॉबर्ट जे. फ्लेहर्टी ने किया था, जबकि जोल्टन कोर्डा ने इसे पूरा किया और इसके लिए वेनिस फिल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार भी जीता।
    साबू ने इसके बाद ‘द थीफ ऑफ बगदाद’ (1940), ‘जंगल बुक’ (1942), ‘अरेबियन नाइट्स’ (1942) और ‘ब्लैक नार्सिसस’ (1947) जैसी हॉलीवुड फिल्मों में अहम भूमिकाएं निभाईं। वे पूरब और पश्चिम के बीच एक सांस्कृतिक पुल बन गए थे। इसके साथ ही उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना में भी सेवा दी। 1960 में उन्हें हॉलीवुड ‘वॉक ऑफ फेम’ में भी स्थान मिला। दुर्भाग्य से, 1963 में मात्र 39 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।

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