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    सांवलिया सेठ के दरबार में अनोखा चढ़ावा, भक्त ने चढ़ाई चांदी की बंदूक और गोली

    श्री सांवलिया सेठ: मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में इस बार एक अनोखा चढ़ावा देखने को मिला, जिसने भक्तों और मंदिर प्रशासन दोनों को चौंका दिया. एक अज्ञात श्रद्धालु ने भगवान सांवलिया सेठ को करीब आधा किलो चांदी से बनी हुई बंदूक और चांदी की ही एक गोली भेंट की है.

    जहां आमतौर पर मंदिरों में फूल-माला, मिठाई या नकद भेंट दी जाती है तो वहीं सांवलिया सेठ के भक्तों की भक्ति अक्सर अनोखी और विशिष्ट होती है. भक्तों ने चांदी के मोबाइल, ट्रैक्टर, मकान की चाभी और यहां तक कि पूरी फसल तक भेंट की है, लेकिन चांदी की बंदूक पहली बार देखने को मिली है, जिसने दर्शन के लिए आए लोगों को हैरान कर दिया.

    500 ग्राम बंदूक का वजन

    मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, इस बंदूक को शुद्ध चांदी से बारीकी से तराशा गया है और इसका वजन लगभग 500 ग्राम है. इसके साथ एक चांदी की गोली भी भेंट की गई है. चढ़ावा देने वाले भक्त की पहचान सामने नहीं आई है और न ही उसने कोई पत्र या नाम छोड़ा है. मंदिर ट्रस्ट ने इस चढ़ावे को स्वीकार कर मंदिर भंडार में सुरक्षित रखवा दिया है.

    कुछ लोग इसे शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक मान रहे हैं तो वहीं कुछ इसे श्रद्धा का नया रूप कह रहे हैं. इस चढ़ावे के पीछे भक्त की भावना क्या रही, यह तो वही जानता है, लेकिन यह निश्चित है कि यह अनोखी भेंट आने वाले समय में चर्चा का विषय बनी रहेगी.

    करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र

    श्री सांवलिया सेठ का मंदिर न केवल राजस्थान, बल्कि देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. हर दिन हजारों लोग सांवलिया सेठ के दर पर माथा टेकते हैं. हर महीने करोड़ों रुपए का चढ़ावा आता है. श्री सांवलिया सेठ मंदिर, चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित एक प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर है. यह मंदिर भगवान कृष्ण के सांवले रूप को समर्पित है और भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है.

    दूर-दूर से भक्त दर्शन को आते हैं यहां

    मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने भोलाराम गुर्जर के सपने में आकर उन्हें इस मंदिर का निर्माण करने का निर्देश दिया था. यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि इसकी वास्तुकला भी देखने लायक है. मंदिर में भगवान कृष्ण की मूर्ति को विशेष रूप से प्रतिष्ठित किया गया है और भक्त दूर-दूर से यहां दर्शन के लिए आते हैं.

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