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    छतरपुर का 1000 साल पुराना हनुमान मंदिर, जहां बिना बुलावे नहीं पहुंच पाते भक्त

    मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से लगभग 50 किमी दूर नौगांव के सिंहपुर गांव में उर्मिल नदी के किनारे एक अत्यंत प्राचीन हनुमान मंदिर स्थित है। स्थानीय मान्यताओं और बुजुर्गों के अनुसार, यह मूर्ति लगभग 1000 साल पुरानी है। बताया जाता है कि सदियों पहले यहाँ 'बीरानखेरा' नाम की एक बस्ती हुआ करती थी, जो समय के साथ पूरी तरह उजड़ गई। लेकिन बस्ती के उजड़ने के बावजूद हनुमान जी की यह प्रतिमा आज भी अपने मूल स्थान पर वैसे ही विराजमान है।

    दक्षिण मुखी 'बाल हनुमान' का अद्भुत रूप

    इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता हनुमान जी का 'बाल रूप' है। यहाँ हनुमान जी एक बालक के रूप में विराजे हैं और यह प्रतिमा दक्षिण मुखी है। मंदिर के पुजारी सुरेशदास बताते हैं कि बाल हनुमान की ऐसी सिद्ध और सुंदर मूर्ति पूरे जिले में कहीं और देखने को नहीं मिलती। साल 1984 में छतरपुर के तत्कालीन कलेक्टर होशियार सिंह भी इस मूर्ति की महिमा से इतने प्रभावित थे कि वे हर मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से दर्शन करने यहाँ आया करते थे।

    निर्मोही अखाड़ा और मंदिर का इतिहास

    यह मंदिर परिसर चित्रकूट के 'निर्मोही अखाड़ा' संस्था से जुड़ा हुआ है। पुजारी के अनुसार, उनके गुरु शिवलोचन दास साल 1993 में यहाँ आए थे। उस समय हनुमान जी की प्रतिमा एक छोटी सी मड़िया (कच्चे मंदिर) में स्थापित थी। बाद में गुरुजी ने ही इस मंदिर का विस्तार कराया और इसे भव्य रूप दिया। पुजारी जी बताते हैं कि उनके गुरु और गांव के पुराने बुजुर्ग हमेशा से ही इस मूर्ति को 1000 साल प्राचीन बताते आए हैं।

    भक्तों की आस्था और पूरी होती मनोकामनाएं

    स्थानीय लोगों में इस मंदिर के प्रति अटूट विश्वास है। ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त यहाँ सच्चे मन से अपनी अर्जी लगाता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। उर्मिल नदी के किनारे शांत वातावरण में स्थित यह सिद्ध पीठ अब केवल सिंहपुर ही नहीं, बल्कि पूरे जिले के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है। लोग इस चमत्कारिक और प्राचीन प्रतिमा के दर्शन करने दूर-दूर से यहाँ पहुँचते हैं।

     

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