राष्ट्रीय पत्रकार संगोष्ठी 27 जुलाई को टोंक में, आचार्य श्री वर्धमान सागरजी के सान्निध्य में होगा ऐतिहासिक आयोजन
मिशन सच न्यूज, टोंक (राजस्थान)। पत्रकारिता सिर्फ समाचारों की दुनिया नहीं है, यह समाज का दर्पण भी है और दिशा भी। जब यह पत्रकारिता धर्म, आध्यात्म और मूल्यों से जुड़ती है, तब वह केवल सूचना नहीं, एक संस्कार बन जाती है। ऐसे ही संस्कारी विचारों को साकार करने जा रहा है “शांति समागम – राष्ट्रीय पत्रकार संगोष्ठी”, जो 27 जुलाई, रविवार को राजस्थान के टोंक शहर स्थित जैन नसियाँ जी में आयोजित होगी।
यह अवसर केवल एक संगोष्ठी का नहीं, बल्कि उस संत स्मृति का भावपूर्ण पुनःस्मरण है, जिन्होंने तप, त्याग और संयम के सहारे भारत की आत्मा को जाग्रत किया — आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज। संगोष्ठी उनके आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी समारोह के अंतर्गत आयोजित की जा रही है, जो जैन समाज ही नहीं, पूरे भारत की आध्यात्मिक चेतना के लिए एक अमूल्य प्रेरणा स्रोत हैं।
इस ऐतिहासिक संगोष्ठी का आयोजन परम पूज्य पंचम् पट्टाधीश, राष्ट्र गौरव, वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागरजी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य व आशीर्वाद से किया जा रहा है। आयोजन का समय प्रातः 8 बजे निर्धारित है, जिसमें देशभर के वरिष्ठ और नवांकुर पत्रकार, लेखक व संपादक एकत्र होंगे — न केवल विचार-विमर्श के लिए, बल्कि एक सकारात्मक संवाद यात्रा के सहभागी बनने के लिए।
इस संगोष्ठी का संयोजन जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेन्द्र जैन महावीर (सनावद, मप्र) के मार्गदर्शन में किया जा रहा है, जबकि समन्वयन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी में उन सभी पत्रकारों की सहभागिता होगी जिन्होंने वर्षों से जैन धर्म के प्रचार-प्रसार में कलम के माध्यम से अमूल्य योगदान दिया है।
संवाद से समाधान की यात्रा
संगोष्ठी का मूल भाव अत्यंत मार्मिक और भावनात्मक है —
“आचार्य श्री के सान्निध्य में – समागम से संवाद, संवाद से समाधान, समाधान से समन्वय, समन्वय से समाज, समाज से सद्भावना, सद्भावना से समृद्धि, समृद्धि से समानुभूति, समानुभूति से संवेदना और संवेदना से शांति।”
यह कोई मात्र शब्दों की श्रृंखला नहीं, बल्कि एक ऐसा मार्ग है, जो वर्तमान समय की अशांति, भ्रम और विषमता के अंधकार को दूर करने की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है। आज जब पत्रकारिता स्वयं अपने अस्तित्व की कसौटी पर है, तब यह संगोष्ठी न केवल पत्रकारों को आंतरिक आत्मबोध देगी, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी पुनर्जीवित करेगी।
देशभर से जुटेंगे वरिष्ठ पत्रकार
जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश जैन तिजारिया ने बताया कि इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से वरिष्ठ व श्रेष्ठ जैन पत्रकार भाग लेंगे। उन्होंने सभी पत्रकारों से 27 जुलाई को प्रातः 8 बजे अग्रवाल जैन नसियाँ जी, टोंक पहुंचकर इस अद्वितीय संगोष्ठी का हिस्सा बनने का हार्दिक निवेदन किया है।
उन्होंने कहा, “पत्रकार केवल समाचार नहीं लिखते, वे विचारों की धाराएं प्रवाहित करते हैं। यदि यह धाराएं धर्म, शांति और सेवा से जुड़ें तो समाज को दिशा देने वाली क्रांति जन्म लेती है।”
आयोजनकर्ता संस्थाओं की भूमिका
इस आयोजन का संचालन वात्सल्य वारिधि वर्धमान वर्षायोग समिति एवं सकल दिगंबर जैन समाज, टोंक के सौजन्य से किया जा रहा है। यह समितियाँ वर्षों से धर्म, शिक्षा व सामाजिक चेतना के क्षेत्र में सक्रिय रही हैं और अब पत्रकारों को भी एक भावनात्मक मंच देकर समाज परिवर्तन की इस यात्रा में सहभागी बना रही हैं।
एक आध्यात्मिक अनुभूति
इस संगोष्ठी की विशेषता केवल इसका विषय नहीं, बल्कि इसका वातावरण भी होगा। आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में संवाद करने का सौभाग्य स्वयं में एक आध्यात्मिक अनुभूति है। ऐसे क्षण विरले होते हैं जब धर्म और पत्रकारिता एक-दूसरे के हाथ थामकर समाज के कल्याण की बात करते हैं।
आज जब दुनिया में सूचना की बाढ़ है, लेकिन संवेदना का सूखा है — तब यह “शांति समागम” पत्रकारिता को संवेदनशीलता, करुणा, विनम्रता और उत्तरदायित्व का पाठ पढ़ाएगा।
समापन में यही भाव…
27 जुलाई को टोंक में न केवल पत्रकार एकत्र होंगे, बल्कि उनके विचार, चिंतन और कलम की संवेदना भी एक नई दिशा में बह निकलेगी। यह आयोजन एक नई पत्रकारिता की शुरुआत का संकेत है — जहाँ शब्द शस्त्र नहीं होंगे, सेवा के साधन बनेंगे।
मिशन सच से जुडने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को फॉलो करे https://chat.whatsapp.com/JnnehbNWlHl550TmqTcvGI?mode=r_c
इसी तरह की स्टोरी के लिए देखें मिशन सच की अन्य रिपोर्ट https://missionsach.com/dr-dilip-sethi-alwar-pediatrician-biography.html

