बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज ने वाल्मीकि समाज से किया भावुक आह्वान, बोले— “आधी रोटी खाएंगे, लेकिन बच्चों को पढ़ाएंगे,बड़ा आदमी बनेंगे, झाड़ू नहीं लगाएंगे”
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मिशनसच न्यूज, इटारसी। मध्य प्रदेश के इटारसी शहर में अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा का 18वां दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन भव्यता और जनसमूह के बीच प्रारंभ हुआ। इस आयोजन की अध्यक्षता उज्जैन से राज्यसभा सांसद और आध्यात्मिक मार्गदर्शक परम श्रद्धेय गुरुजी बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज ने की। देशभर से आए प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं की उपस्थिति में गुरुजी ने वाल्मीकि समाज के उत्थान के लिए भावुक लेकिन प्रेरणादायी उद्बोधन दिया।
गुरुजी ने अपने संबोधन में समाज को एक संकल्प दिलाया—
“आधी रोटी खाएंगे, लेकिन बच्चों को पढ़ाएंगे। बड़ा आदमी बनेंगे, झाड़ू नहीं लगाएंगे।”
इस संकल्प में सिर्फ एक सामाजिक संदेश नहीं, बल्कि उस पीड़ा और आकांक्षा का स्वर था जिसे वर्षों से वाल्मीकि समाज झेलता आया है।
शिक्षा: समाज को ऊँचाई देने वाला सबसे बड़ा हथियार
बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज ने जोर देकर कहा कि अगर समाज को आगे ले जाना है, तो शिक्षा ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा कि एक समय का भोजन छूट जाए तो भी चलेगा, लेकिन बच्चों की पढ़ाई छूटनी नहीं चाहिए। शिक्षा ही वह औजार है जिससे समाज अपने ऐतिहासिक अपमान और सामाजिक असमानताओं को चुनौती दे सकता है।
“जो समाज अपने बच्चों को शिक्षित करता है, वही समाज विकास की दौड़ में शामिल हो पाता है। अब समय आ गया है कि वाल्मीकि समाज अपनी अगली पीढ़ी को शिक्षित कर अफसर, डॉक्टर, इंजीनियर, व्यापारी और समाज सुधारक बनाए।” – बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज
गुरुजी ने स्पष्ट किया कि समाज को अब अपने ऊपर लगे ‘झाड़ू के कलंक’ को हमेशा के लिए मिटाने का साहस दिखाना होगा। उन्होंने कहा कि कोई भी बच्चा अब झाड़ू नहीं उठाएगा, बल्कि कलम और किताब को अपना हथियार बनाएगा।
गुरुजी का स्वागत और देशभर से पदाधिकारियों की उपस्थिति
अधिवेशन की शुरुआत में राष्ट्रीय महासचिव राजेंद्र अजय पदम, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रतन डागर, प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश धौलपुर, प्रदेश महासचिव नवीन चंदेल, प्रदेश संगठन मंत्री ओमप्रकाश परोचिया और पंजाब से आए अन्य पदाधिकारियों ने गुरुजी का भव्य स्वागत किया। उन्हें विशाल पुष्पमालाओं और सम्मान प्रतीकों से अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर राजेंद्र अजय पदम ने कहा,
“गुरुजी केवल संत नहीं, समाज के मार्गदर्शक और संघर्ष के प्रतीक हैं। उनका हर शब्द समाज के लिए दीपक की तरह है, जो अंधेरे में रास्ता दिखा रहा है।”
राष्ट्रव्यापी सहभागिता: एकता का सशक्त प्रदर्शन
इस दो दिवसीय अधिवेशन में देशभर से वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, कोलकाता, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से आए प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
रामगोपाल राजा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, कोटा, राजस्थान)
मोहन लाल बगान (पंजाब)
शंकर वाल्मीकि (उत्तर प्रदेश)
कन्हैया लाल कालोसिया (राजस्थान)
शिवलाल तेजी (बीकानेर, राजस्थान)
राजेंद्र कुमार (अलावलपुर, पंजाब)
अजय नाहर (उत्तर प्रदेश)
मनोज वाल्मीकि और रूपेश वाल्मीकि (कोलकाता)
पुरुषोत्तम टैगोर (मध्य प्रदेश)
विवेक गुरु और प्रशांत गुरु (गाडरवारा)
मनजीत सापति (इटारसी)
इन सभी प्रतिनिधियों ने समाज की एकता, शिक्षा, रोजगार और सम्मान के मुद्दों पर विचार साझा किए और गुरुजी के नेतृत्व पर एकमत सहमति जताई।
युवाओं के लिए प्रेरणा, समाज के लिए दिशा
इस अधिवेशन में हजारों युवाओं की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि समाज जाग चुका है। अब वह केवल अपने अधिकारों की बात नहीं कर रहा, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों को भी स्वीकार कर रहा है। बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज के भाषण ने युवाओं को प्रेरित किया कि शिक्षा के क्षेत्र में वे पीछे न रहें।
गुरुजी ने उदाहरण के साथ बताया कि कैसे शिक्षा से समाज के कई बच्चे सरकारी सेवाओं, निजी उद्योगों और उच्च शिक्षा में आगे बढ़े हैं। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि समाज के जो लोग सक्षम हैं, वे आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों की मदद करें, ताकि कोई बच्चा केवल पैसों के कारण पढ़ाई से वंचित न रह जाए।
समापन में दिया साधुवाद और लिया संकल्प
अधिवेशन के समापन पर गुरुजी ने सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समाजजनों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह अधिवेशन केवल बैठक नहीं, बल्कि आंदोलन की शुरुआत है। समाज को संगठित होकर शिक्षा, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना है।
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