घास बिक्री केंद्रों को काइन हाउस व गौशालाओं के बाहर स्थापित करने की मांग, लावारिस मवेशियों से शहरवासियों को निजात दिलाएं
मिशनसच न्यूज, भीलवाड़ा। शहर में लावारिस मवेशियों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। आए दिन सड़क पर मवेशियों के झुंड के कारण जाम, दुर्घटनाएं और गंदगी की समस्या देखने को मिल रही है। इस गंभीर स्थिति पर ध्यान आकर्षित करते हुए पीपल फॉर एनिमल्स के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू ने जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू एवं नगर निगम आयुक्त हेमाराम चौधरी को पत्र लिखकर महत्वपूर्ण मांग रखी है।
उन्होंने कहा कि शहर में विभिन्न स्थानों पर अवैध रूप से घास बिक्री केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों की वजह से बड़ी संख्या में लावारिस मवेशी वहीं इकट्ठा हो जाते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा और गंदगी की समस्या बढ़ रही है। जाजू ने मांग की है कि इन अवैध केंद्रों को बंद किया जाए और केवल गौशालाओं व काइन हाउस के बाहर ही घास बिक्री केंद्र स्थापित किए जाएं।
अवैध घास बिक्री केंद्रों की सूची
जाजू ने अपने पत्र में शहर के कई प्रमुख स्थानों का उल्लेख किया, जहां प्रतिदिन नगर निगम की अनुमति के बिना घास बेची जा रही है। इनमें शामिल हैं –
कावाखेड़ा सगस जी मंदिर के पास
कुमुद विहार एक एवं दो के बीच पांच स्थान
वीर सावरकर चौक, हरीशेवा के पीछे
नेहरू रोड मार्ग
सज्जन विला, आजाद नगर
दूधाधारी मंदिर के सामने
बाहेती धर्मशाला, माणिक्य नगर सब्जी मंडी
छोटी पुलिया, सुभाष नगर
गायत्री आश्रम सत्यम कॉम्प्लेक्स
पुर रोड, लेबर कॉलोनी
शनि महाराज मंदिर के आगे
कुंभा सर्कल, आजाद नगर
देवरिया बालाजी मंदिर के पास
रामधाम की पुलिया
शाम की सब्जी मंडी
इन जगहों पर रोजाना बड़ी संख्या में घास बिक रही है। मवेशियों के झुंड यहां इकट्ठा होकर सड़क अवरुद्ध कर देते हैं, जिससे आमजन का आवागमन बाधित होता है।
नगर पालिका अधिनियम का उल्लंघन
जाजू ने कहा कि राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 247, 248, 250 और 254 की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है। नगर निगम की अनुमति के बिना यह गतिविधि अवैध है, बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
दुर्घटनाएं और गंदगी से परेशान आमजन
लावारिस मवेशियों के झुंड न केवल ट्रैफिक जाम का कारण बनते हैं बल्कि कई बार इनके आपस में भिड़ जाने से हादसे भी हो चुके हैं। अब तक सैकड़ों लोग इन दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। वहीं, इन स्थलों पर लगातार गंदगी फैलने से शहर की साफ-सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
ट्रेचिंग ग्राउंड बना वीरान
जाजू ने बताया कि वर्ष 2010 में नगर परिषद द्वारा ट्रेचिंग ग्राउंड परिसर में लावारिस गायों और अन्य पशुओं को रखने के लिए एक आश्रय स्थल बनाया गया था। लेकिन वर्षों से वह स्थल खाली पड़ा है। यदि प्रशासन चाहे तो वहां शहर के लावारिस पशुओं को सुरक्षित रखकर खाने-पीने की उचित व्यवस्था की जा सकती है।
समाधान का सुझाव
जाजू ने कहा कि यदि घास खरीदने वाले लोग सीधे गौशालाओं और काइन हाउस के बाहर से ही घास खरीदेंगे, तो इसका दोहरा लाभ होगा। एक ओर गौशालाओं को आय का स्रोत मिलेगा, वहीं दूसरी ओर शहर की सड़कों पर मवेशियों के झुंड जमा नहीं होंगे।
करोड़ों रुपये खर्च, लेकिन व्यवस्था नदारद
उन्होंने यह भी कहा कि स्टांप ड्यूटी पर 10 प्रतिशत गौ-सेस वसूला जा रहा है, जिससे प्रतिवर्ष भीलवाड़ा जिले से करोड़ों रुपये इकठ्ठा होते हैं। इसके बावजूद शहर में गौ-संरक्षण और लावारिस मवेशियों की देखभाल की कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखाई देती।
नागरिकों की अपेक्षा
भीलवाड़ा के नागरिक लंबे समय से इस समस्या से परेशान हैं। अब उम्मीद की जा रही है कि जिला प्रशासन और नगर निगम इस दिशा में ठोस कदम उठाकर न केवल अवैध घास बिक्री केंद्रों को बंद कराएंगे, बल्कि लावारिस मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान भी निकालेंगे।

