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    कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी बोले- जनगणना 2027 बनेगी सामाजिक बदलाव का माध्यम

    चंडीगढ़ । कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी (Congress MP Manish Tiwari) ने कहा कि जनगणना 2027 (Census 2027) को सामाजिक न्याय का परिवर्तनकारी उपकरण बनाया जाए (Make transformative tool for Social Justice) ।

    आगामी जनगणना 2027 में उप-जातियों की गणना अवश्य शामिल की जानी चाहिए । मनीष तिवारी ने कहा कि संविधान सभा ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय पर आधारित आधुनिक राष्ट्र-राज्य के निर्माण का संकल्प लिया था। इसी के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों को समान अवसर और अधिकार सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक प्रावधान किए गए।

    उन्होंने कहा कि उप-जातियों और गोत्र जैसे वंशानुगत पहचान चिह्नों को शामिल किए बिना, और उन्हें आर्थिक संकेतकों से जोड़े बिना, जनगणना 2027 भारतीय समाज की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं ला पाएगी। यह केवल राजनीतिक प्रतीकवाद तक सीमित रह जाएगी और नीतिनिर्माण में इसका ठोस उपयोग नहीं हो सकेगा।

    मनीष तिवारी ने ज़ोर दिया कि जस्टिस रोहिणी आयोग की रिपोर्ट पहले ही दिखा चुकी है कि ओबीसी उप-जातियों में असमानता बनी हुई है, जहाँ केवल 25% उप-जातियों ने 97% आरक्षण लाभ उठाया। यदि विस्तृत दस्तावेज़ीकरण नहीं होगा, तो नीतियाँ केवल प्रभुत्वशाली उप-समूहों को ही लाभ पहुंचाएँगी और आंतरिक विषमता बनी रहेगी।
    उन्होंने कहा कि डिजिटल जनगणना से यह अवसर है कि समाज का एक्स रे, एमआरआई और सीटी स्केन तैयार किया जाए, ताकि वास्तविक वंचित वर्गों तक लाभ पहुँच सके। इसके लिए आवश्यक है कि राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति दिखाई जाए और जनगणना 2027 को मात्र गिनती और आँकड़े से आगे ले जाकर सामाजिक न्याय का परिवर्तनकारी उपकरण बनाया जाए|

    उन्होंने कहा कि यह देश की पहली पूर्णत: डिजिटल जनगणना होगी, जो परिष्कृत डेटा एनालिटिक्स और मेटाडेटा अध्ययन का अभूतपूर्व अवसर प्रदान करती है, लेकिन यदि डेटा संग्रहण केवल व्यापक जाति श्रेणियों तक सीमित रहा, तो यह अवसर व्यर्थ हो जाएगा।

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