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    अलवर में सकल जैन समाज की भव्य घट यात्रा 28 अक्टूबर से — धार्मिक उत्साह के साथ निकलेगी शोभायात्रा

    अलवर में सकल जैन समाज द्वारा 28 अक्टूबर से भव्य घट यात्रा निकाली जाएगी। श्री सम्भवनाथ दिगम्बर जैन मंदिर शिवाजी पार्क से प्रारंभ होकर जैन भवन स्कीम 10 तक यह यात्रा धार्मिक उत्साह के साथ निकलेगी। आयोजन में संत वसुनंदी जी महाराज सहित अनेक मुनि श्री सानिध्य देंगे।

    अलवर, मिशनसच न्यूज ।
    धार्मिक नगरी अलवर में जैन समाज एक बार फिर एक दिव्य और भव्य आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है।
    सकल जैन समाज अलवर द्वारा आगामी 28 अक्टूबर 2025 को भव्य घट यात्रा निकाली जाएगी। यह आयोजन श्री चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर, मुंशी बाजार एवं णमोकार उपासना वर्षायोग समिति-2025, अलवर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।

    यह घट यात्रा श्री सम्भवनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, शिवाजी पार्क, अलवर से प्रातः 7:30 बजे बैंड-बाजे, लबाजमे, संगीतमय भजनों और धार्मिक उल्लास के साथ प्रारंभ होकर जैन भवन मंदिर, स्कीम-10, अलवर पहुंचेगी।
    पूरे शहर में यह यात्रा धर्म, आस्था और एकता का संदेश प्रसारित करेगी।

    इस आयोजन का पावन अवसर प्राप्त होगा परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी राष्ट्र हितैषी संत आचार्य 108 श्री वसुनंदी जी महा मुनिराज के परम आशीर्वाद से।
    उनके प्रभावक शिष्य उपाध्याय 108 श्री विज्ञानंद जी महाराज, मुनि 108 श्री पुण्यानंद जी महाराज और मुनि 108 श्री धैर्यनंद जी महाराज भी अपने सानिध्य से आयोजन को धन्य करेंगे।

    कार्यक्रम के अंतर्गत 28 अक्टूबर से 9 नवंबर 2025 तक जाप्यानुष्ठान, विधान व पिछि परिवर्तन जैसे पवित्र धार्मिक आयोजन अलवर में संपन्न होंगे।

    आयोजन समिति ने बताया कि यह यात्रा जैन धर्म की परंपरा, शांति और अहिंसा के मूल संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनेगी। यात्रा के दौरान नगरवासी पुष्पवर्षा और स्वागत द्वारों से घट यात्रा का स्वागत करेंगे।

    महिलाओं के लिए विशेष निर्देश भी जारी किए गए हैं —
    पूर्व घट यात्राओं की परंपरा के अनुसार महिलाएं पीली, लाल चुनरी वाली साड़ी पहनकर आएं और घर से मंगल कलश साथ लाएं, ताकि घट यात्रा की भव्यता और आध्यात्मिकता और बढ़ सके।

    पूरे आयोजन को लेकर समाज में उल्लास और भक्ति का माहौल है। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह जैन समाज की एकता, श्रद्धा और अनुशासन का प्रतीक भी है।

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