भारत सरकार ने पीली दाल (मटर) पर 10% मानक दर और 20% एआइडीसी आयात शुल्क 1 नवंबर 2025 से प्रभावी किया। किसान महापंचायत की जनहित याचिका पर उच्चतम न्यायालय 28 नवंबर को सुनवाई करेगा। इससे दलहन बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद।
मिशनसच न्यूज, जयपुर । भारत सरकार ने 29 अक्टूबर 2025 को अधिसूचना जारी कर पीली मटर (Yellow Pea) के आयात पर 10% मानक शुल्क (Basic Customs Duty) और 20% एग्रीकल्चरल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) लागू करने की घोषणा की है। यह दरें 1 नवंबर 2025 से प्रभावी हो गई हैं।
इस निर्णय से दलहन बाजार में स्थिरता आने और अरहर व चना जैसी देशी दालों के मूल्यों में गिरावट रुकने की संभावना बढ़ गई है। लंबे समय से किसान संगठनों द्वारा मांग की जा रही थी कि सस्ते आयात के कारण घरेलू बाजार में दालों के दाम गिर रहे हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
किसान महापंचायत की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का संज्ञान
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट द्वारा इस विषय पर उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार के उदार आयात नीति के कारण भारतीय किसानों को अपनी उपज घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से भी कम दरों पर बेचने को विवश होना पड़ रहा है।
याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ — न्यायमूर्ति सूर्यकांत, उज्जल भुयान और नोगमीकापम कोटेश्वर सिंह ने 25 सितंबर 2025 को मामले का संज्ञान लिया और भारत सरकार से जवाब मांगा था। अगली सुनवाई 28 नवंबर 2025 को निर्धारित की गई है।
याचिका में यह भी कहा गया था कि आयातित मटर और अन्य दालें बाजार में सस्ते दामों पर आने से घरेलू दलहन उत्पादक किसानों को भारी आर्थिक हानि हो रही है।
किसानों की स्थिति और बाजार का हाल
वर्तमान में देश में अरहर के भाव MSP से लगभग 27% कम चल रहे हैं। किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों में बेचनी पड़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब चना और मूंग की नई फसल बाजार में आएगी, तब भी स्थिति कुछ ऐसी ही रह सकती है यदि आयात पर नियंत्रण नहीं किया गया।
किसान संगठनों का कहना है कि भारत सरकार कई बार संसद में यह घोषणा कर चुकी है कि किसी भी किसान को घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दर पर फसल बेचने को विवश नहीं होना चाहिए, परंतु ज़मीनी हकीकत इससे अलग है।
सरकार की नीतियाँ और विरोधाभास
केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2024 को घोषणा की थी कि अरहर, उड़द और मसूर की उपज का शत-प्रतिशत सरकारी खरीद (MSP पर) की जाएगी, जिससे किसानों को राहत मिलेगी।
लेकिन चना और मूंग जैसी अन्य दलहनों पर अभी भी कुल उत्पादन का केवल 25% तक खरीदने की सीमा बनी हुई है।
किसान संगठनों का कहना है कि यह नीति भारत को दलहनों में आत्मनिर्भर बनाने के सरकारी लक्ष्य के विपरीत है। अगर किसानों को उचित दाम और बाजार सुरक्षा नहीं मिलेगी तो उत्पादन में गिरावट आना स्वाभाविक है।
एग्री फार्मर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन की भूमिका
इस मुद्दे पर एग्री फार्मर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन ने भी सरकार के समक्ष अपने विचार रखे और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मांग की कि आयात को नियंत्रित किया जाए, ताकि घरेलू किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।
किसान संगठनों की उम्मीदें
किसान महापंचायत और अन्य संगठनों को उम्मीद है कि पीली मटर पर आयात शुल्क लागू होने से अब दाल बाजार में मूल्य स्थिरीकरण आएगा और किसानों को उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
किसान महापंचायत के कार्यालय सचिव गोपाल सैनी (जयपुर) ने कहा कि यह कदम किसान आंदोलन की निरंतर आवाज का परिणाम है।
उन्होंने कहा — “सरकार ने यदि दलहन उत्पादों के मूल्य और खरीद नीति में स्थिरता लाई, तो देश आत्मनिर्भरता की दिशा में वास्तविक रूप से आगे बढ़ सकेगा।”

