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    छतरपुर के 5 चमत्कारी मंदिर, जहां शादी, संतान और स्वास्थ्य तीनों का मिलता है वरदान, दूर-दूर से आते हैं लोग

    अगर आप एमपी के छतरपुर में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यहां आप 5 ऐसे मंदिर भी घूम सकते हैं जहां शादी और संतान का आशीर्वाद मिलता है. साथ ही यहां चर्म रोग भी ठीक होते हैं.
     अगर आप ठंड सीजन में एमपी के छतरपुर में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यहां आप 5 ऐसे मंदिर भी घूम सकते हैं, जो दर्शनीय स्थल, तो हैं ही, साथ ही अपने चमत्कार के लिए भी जाने जाते हैं.
     खजुराहो में स्थित भगवान शिव का ये मंदिर कुंवर मठ के नाम से भी जाना जाता है.  इस मंदिर को दूल्हा देव मंदिर के नाम से भी जाना जाता हैं. मंदिर के गर्भगृह में एक सुंदर शिवलिंग स्थापित है.
     लोकमान्यता है कि मंदिर के द्वार से बारात के लिए जो दूल्हा निकलता है वह इस मंदिर में आकर आशीर्वाद जरूर लेता है. क्योंकि इस मंदिर में भगवान शिव दूल्हा देव के रुप में विराजमान हैं.  मान्यता है कि शिवलिंग की एक परिक्रमा 1000 परिक्रमाओं के बराबर होती है.
     छतरपुर के बिजावर तहसील में स्थित जटाशंकर धाम जिसे केदारनाथ मंदिर भी कहा जाता है. यह धाम भगवान शिव की अनूठी कृपा और कई अलौकिक शक्तियों के लिए जाना जाता है. इस धाम के अंदर तीन कुंड मौजूद हैं, जिसमें से ठंडा, गर्म और साधारण पानी आता है. ऐसा माना जाता है कि इन कुंडों में स्नान करने से बड़े से बड़ा चर्म रोग दूर हो जाता है. यही वजह है कि लोग यहां से जल लेकर अपने-अपने घर ले जाते हैं.
     खजुराहो में स्थित मंतगेश्वर महादेव मंदिर अपने आप में अनोखा है. यह मंदिर खजुराहो में सबसे पहले बना था. इस मंदिर का निर्माण 8-9वीं शताब्दी में बना था.शिवलिंग को हांथ से स्पर्श करने पर यहां श्रद्वालुओं की मनोकामना पूरी हो जाती है. हांथ से स्पर्श करने पर श्रद्धालुओं को एहसास होता है कि उनकी मनोकामना पूरी होती है.
     छतरपुर जिले के लवकुश नगर मां बंबरबैनी माता मंदिर में एक ऐसा चमत्कारिक कुंड है, जहां संतान के रूप में बेटी की इच्छा पूरी होती है. दरअसल, इस चमत्कारिक कुंड में माता साक्षात विराजमान हैं. इस कुंड में पानी-दूध चढ़ाने के बाद मनोकामना मांगते समय बतासे डालने की परंपरा है. अगर एक बतासा भी ऊपर आ जाता है, तो आपकी मनोकामना पूरी हो जाती है.
     शनि मंदिर मऊ सहानिया, छतरपुर जिले के नौगाँव और धुबेला क्षेत्र में प्राचीन शनि मंदिर स्थित है. ये तालाब के बीचों-बीच स्थित है. हालांकि, यहां तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क बनी हुई है. इस मंदिर में शनि के साथ 9 ग्रह भी विराजमान हैं. इसलिए इसे शनि नवग्रह मंदिर भी कहते हैं. यहां शनिवार को दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं. यहां शनि देव की प्रतिमा पर तिल का तेल, काली तिल और उड़द चढ़ाने की परंपरा है. मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से पूजा करने पर शनिदेव कृपा बरसाते हैं.
     अगर आप मप्र के छतरपुर घूमना चाहते हैं तो यहां के चमत्कारी मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं. हवाई मार्ग से आप खजुराहो आ सकते हैं. साथ ही रेल मार्ग से छतरपुर और खजुराहो रेलवे स्टेशन आ सकते हैं. यहां से आप कार में खजुराहो के मंदिर, बिजावर के जटाशंकर धाम, मऊ सहानिया और लवकुश नगर जा सकते हैं.

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