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    पुण्य नहीं है तो जीवन में कुछ भी नहीं, धर्म के साथ ही आती है लक्ष्मी — उपाध्याय वृषभानन्द महाराज


    तपस्या भी तभी सफल होती है जब जीवन में पुण्य होता है

    मिशनसच न्यूज, अलवर,।स्थानीय मुंशी बाजार स्थित श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में बुधवार को जैन संत उपाध्याय वृषभानन्द महाराज और उपाध्याय विज्ञानन्द महाराज ने संयुक्त रूप से प्रवचन दिए। प्रवचन के दौरान दोनों संतों ने जीवन में पुण्य और धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “जिसके जीवन में पुण्य नहीं, उसके जीवन में कुछ भी नहीं।”

    संत वृषभानन्द महाराज ने कहा कि धर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति न केवल आत्मिक शांति प्राप्त करता है, बल्कि लक्ष्मी (समृद्धि) भी स्वयं उसके पीछे-पीछे आती है। उन्होंने कहा कि तपस्या भी तभी सफल होती है जब जीवन में पुण्य होता है। “अगर पुण्य है तो शरीर निरोगी रहता है, और यदि पुण्य नहीं है तो किसी से एक गिलास पानी भी नहीं मिलेगा,” उन्होंने कहा।

    उपाध्याय विज्ञानन्द महाराज ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी धर्म और पुण्य से दूर होती जा रही है, जो चिंता का विषय है। समाज को आत्ममंथन कर यह समझना होगा कि पुण्य के बिना जीवन बेकार है और धर्म के बिना जीवन सूना।

    प्रवचन के दौरान वातावरण धर्ममय हो उठा। नौगांवा जैन समाज की ओर से दोनों जैन उपाध्यायों को श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।
    कार्यक्रम के संयोजक पवन जैन चौधरी और मंदिर कमेटी अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि संतों के प्रवचन जीवन को दिशा देने वाले होते हैं।

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