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    Homeधर्म-समाजक्या हनुमान चालीसा सच में घटा सकती है मंगल दोष का प्रभाव?...

    क्या हनुमान चालीसा सच में घटा सकती है मंगल दोष का प्रभाव? जानिए कैसे करें पाठ

    हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कई बार ये कठिनाइयां ग्रहों की स्थिति के कारण होती हैं. उनमें से एक महत्वपूर्ण दोष है मंगल दोष. जब किसी की कुंडली में मंगल ग्रह पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है, तो इसे मंगल दोष कहा जाता है. इसे सामान्य भाषा में मांगलिक दोष भी कहा जाता है. मंगल ग्रह अग्नि तत्व का प्रतिनिधि है और इसकी ऊर्जा तेज, सक्रिय और कभी-कभी उग्र होती है. इसका प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव, निर्णय लेने की क्षमता और जीवन की दिशा पर पड़ता है. अक्सर लोग सोचते हैं कि क्या हनुमान चालीसा का पाठ करने मात्र से इस दोष से मुक्ति मिल सकती है. हनुमान जी, जो शक्ति, धैर्य और साहस के प्रतीक हैं, की उपासना करने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. यह न केवल मंगल दोष के प्रभाव को कम करता है, बल्कि जीवन में संतुलन, मानसिक स्थिरता और आत्मविश्वास भी लाता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं

    1. मंगल दोष क्या है?
    मंगल दोष तब उत्पन्न होता है जब कुंडली में मंगल ग्रह पांच संवेदनशील भावों में से किसी एक में बैठा हो. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगल ग्रह की तीन श्रेणियां होती हैं:
    सौम्य मंगल: यह प्रकार हानिरहित होता है और इसके नकारात्मक प्रभाव न्यूनतम होते हैं.
    मध्यम मंगल: इसका असर व्यक्ति पर हल्का होता है और सामान्यतः 28 वर्ष की आयु के बाद कम हो जाता है.
    कड़क मंगल: यह गंभीर दोष उत्पन्न करता है और विवाह या महत्वपूर्ण जीवन निर्णयों में सावधानी की आवश्यकता होती है.

    मंगल दोष का प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव और जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग ढंग से दिखाई देता है.

    2. मंगल दोष के प्रभाव
    ज्योतिष अनुसार, मंगल दोष से प्रभावित व्यक्ति में कुछ विशेष लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
    पहले भाव में मंगल: व्यक्ति में साहस, आक्रामकता और आवेगपूर्ण स्वभाव बढ़ता है.
    चौथे भाव में मंगल: क्रोध, असंतोष और जिद्दी स्वभाव दिखाई देता है.
    सातवें भाव में मंगल: विवाह और साझेदारी संबंधों में बाधाएं आती हैं.
    आठवें भाव में मंगल: अहंकार, हठ और जोखिम भरे निर्णय लेने की प्रवृत्ति बढ़ती है.
    बारहवें भाव में मंगल: मानसिक बेचैनी, संघर्ष और असमझ निर्णय लेने की संभावना रहती है.
    हालांकि, इन प्रभावों की तीव्रता अन्य ग्रहों की स्थिति और उनकी दृष्टि पर निर्भर करती है. यदि मंगल मजबूत और शुभ है, तो व्यक्ति को साहस, नेतृत्व क्षमता और ऊर्जा मिलती है, जबकि अशुभ मंगल जीवन में कठिनाइयां और संघर्ष उत्पन्न करता है.
    3. मंगल से जुड़े देवता
    मंगलवार को भगवान हनुमान और मंगल देव की विशेष पूजा की जाती है. मंगल ग्रह पर मंगल देव का अधिकार होता है, और उनकी पूजा करने से मंगल दोष से राहत मिल सकती है. भारत के विभिन्न मंदिरों में, जैसे उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर, मंगल देव की पूजा की जाती है. हनुमान जी की उपासना भी विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि वे शक्ति, अनुशासन और मानसिक स्थिरता का स्रोत हैं.

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