वाराणसी |केंद्रीय बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काशी को कई सौगातें मिली हैं। वाराणसी के साथ ही पड़ोसी जिलों प्रयागराज, गोरखपुर सहित पूर्वांचल में ढांचागत विकास और बुनियादी जरूरतों का विशेष ध्यान रखा है। वाराणसी से दिल्ली और वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव आने से अब मध्य भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ने के लिए केंद्रीय नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसका केंद्र बनारस होगा।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने नौवें बजट में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र पर विशेष ध्यान रखा है। वर्षों से प्रस्तावित बुलेट ट्रेन जैसी हाईस्पीड ट्रेनों के दौड़ने का सपना अब साकार होने जा रहा है। वाराणसी से नई दिल्ली और वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच दो कॉरिडोर के बजट में प्रावधान से यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।पूर्वांचल में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे। दोनों कॉरिडोर से पर्यटन उद्योग को नए पंख लग जाएंगे। गंगा किनारे 100 करोड़ रुपये से प्रस्तावित जहाज मरम्मत (शिप रिपेयर) केंद्र से जल परिवहन को भी गति मिलेगी। बौद्ध सर्किट में शामिल सारनाथ को 'एक्सपीरिएंशियल कल्चरल डिस्टिनेशन' के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना को और रफ्तार मिलेगी। पर्यटन के नक्शे पर वाराणसी अब और चमकेगा। धार्मिक नगरी में सैलानियों की संख्या दिन प्रतिदिन और बढ़ेगी। महात्मा गांधी हैंडलूम योजना से वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर के साथ खासतौर पर मिर्जापुर, मऊ, भदोही और आजमगढ़ आदि जिलों के हथकरघा उद्योग को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
यूपी की विकास यात्रा को मिलेगी रफ्तार, केंद्र के खजाने से 4.26 लाख करोड़
म्यूनिसिपल बॉन्ड जुटाने में मिलेगी मदद
बजट में म्यूनिसिपल बॉन्ड को बढ़ावा दिया जाना वाराणसी के साथ ही प्रयागराज और गोरखपुर नगर निगमों के लिए संजीवनी साबित होगा। वाराणसी नगर निगम पिछले वर्ष 50 करोड़ रुपये का बॉन्ड जारी कर चुका है।
सारनाथ के महत्व को गहराई से समझ सकेंगे
बुद्ध के प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ को ‘एक्सपीरिएंशियल कल्चरल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने की योजना में शामिल किया जाना केंद्र सरकार की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे ‘विकसित भारत’ के विजन में प्रदेश की केंद्रीय भूमिका को और सुदृढ़ करेगा। इससे पर्यटक सारनाथ के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व को और गहराई से समझ सकेंगे तथा बौद्ध पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।
शिप रिपेयर सेंटर खोलेगा रोजगार के अवसर
गंगा किनारे 600 करोड़ रुपये से एक आधुनिक पोर्ट (मल्टी-मॉडल टर्मिनल) और जहाज मरम्मत (शिप रिपेयर) केंद्र खोलने और संचालन के लिए गत वर्ष आईडब्ल्यूएआई और प्रदेश सरकार के बीच अनुबंध हो चुका है। बजट में 100 करोड़ रुपये से प्रस्तावित जहाज मरम्मत केंद्र से स्थानीय स्तर पर 2000 से अधिक लोगों के लिए रोजगार पैदा होंगे। गंगा में चलने वाले क्रूज या जहाजों को मरम्मत के लिए कोलकाता या चेन्नई नहीं जाना पड़ेगा। इस पहल से रिवर टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। क्रूज की संख्या में भी इजाफा होगा। पूरे प्रदेश में जल परिवहन और पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर माल परिवहन आसान और किफायती हो जाएगा।

