बजट घोषणाओं का क्रियान्वयन कमजोर, जल जीवन मिशन, शिक्षा व वित्तीय प्रबंधन पर सरकार को घेरा
जयपुर। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बुधवार को विधानसभा में पेश राज्य बजट पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे ‘खोखला’, ‘सतही’ और राजस्थान की प्रगति को रोकने वाला दस्तावेज करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस बजट की बुनियाद ही पिछले भाषणों की पुनरावृत्ति हो, वह प्रदेश का भविष्य नहीं संवार सकता।
सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में जूली ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। पिछले दो बजटों में की गई 2718 घोषणाओं में से केवल 900, यानी 30 प्रतिशत से भी कम, पूरी हो सकी हैं, जबकि 284 परियोजनाओं पर अब तक काम शुरू तक नहीं हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार 2026 की जमीनी हकीकत से अनजान है और जवाबदेही से बचने के लिए 2047 के सपने दिखा रही है।
जल जीवन मिशन को सरकार की बड़ी विफलता बताते हुए उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने दो वर्षों में 45 लाख नल कनेक्शन देने का वादा किया था, लेकिन सदन में स्वीकार किया गया कि केवल 14 लाख कनेक्शन ही दिए गए। इसे उन्होंने प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात बताया।
वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी जूली ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा बजट अनुमान 31,009 करोड़ रुपये से बढ़कर 32,982 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि राजस्व प्राप्ति में 9,003 करोड़ रुपये की भारी कमी दर्ज की गई है। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, “उम्र भर ग़ालिब यही भूल करता रहा, धूल चेहरे पे थी आइना साफ़ करता रहा।”
जूली ने ‘नमो वन’ और ‘नमो नर्सरी’ जैसी घोषणाओं को चापलूसी की राजनीति करार देते हुए कहा कि जीवित व्यक्ति के नाम पर वन लगाना भारतीय परंपराओं के विपरीत है। वहीं बजट के दौरान मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर विषय पर हंसी-मजाक को उन्होंने संवेदनहीनता और शर्मनाक बताया।
शिक्षा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के 42 हजार जर्जर स्कूल भवनों की स्थिति पर सरकार मौन है। हिंदी की वकालत करने वाली सरकार ‘CM-RISE’ जैसे अंग्रेजी नामों का सहारा ले रही है। साथ ही रिफाइनरी परियोजना में देरी और भरतपुर जैसे जिलों की अनदेखी से स्पष्ट है कि सरकार के पास कोई ठोस रोडमैप नहीं है।
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