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    कर्मयोग का संदेश गूंजा शिव कथा में, अलवर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

    शिव कृपा महोत्सव के चतुर्थ दिवस पर शिव कथा सुन भावुक हुए भक्त, सुंदरकांड व सांस्कृतिक कार्यक्रम बने आकर्षण

    अलवर। अपना घर शालीमार स्थित श्री राम मंदिर में चल रहे शिव कृपा आनंद महोत्सव के अंतर्गत आयोजित शिव कथा के चतुर्थ दिवस 12 फरवरी को डॉक्टर शिवम साधक जी महाराज ने भक्तों को कर्मयोग और गुरु महिमा का प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भाग्य कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि कर्म अच्छे नहीं होंगे तो वह दुर्भाग्य में बदल सकता है। इसलिए मनुष्य को भाग्य से अधिक कर्म पर ध्यान देना चाहिए। कर्मयोगी व्यक्ति का भाग्य कभी खराब नहीं होता।

    उन्होंने शिव महोत्सव की महिमा बताते हुए कहा कि इसका पाठ करने वाला व्यक्ति जीवन में मनचाही इच्छाओं की प्राप्ति कर सकता है। काशी प्रकृति की कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि काशी मुक्ति की नगरी है, इसलिए वहां से गंगाजल घर नहीं लाना चाहिए, क्योंकि उसके साथ कई सूक्ष्म जीव भी घर आ जाते हैं, जिससे उनकी मुक्ति बाधित हो सकती है।

    कथा के अंत में गुरु महिमा का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए। इस अवसर पर हजारों की संख्या में भक्तजन भगवान शिव का दिव्य चंदन प्रसाद प्राप्त करने पहुंचे। कथा के यजमान मदनलाल गुप्ता रहे, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में वृंदावन से पधारे व्यापार मंडल अध्यक्ष आशीष ठाकुर, डॉ. एस.सी. मित्तल, राकेश गोयल, संदीप अग्रवाल, सुभाष मित्तल, अनिल बंसल और गिरीश गुप्ता उपस्थित रहे।

    शाम 8 बजे सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तगण मंत्रमुग्ध होकर भक्ति में लीन नजर आए। इससे एक दिन पूर्व 11 फरवरी को ब्रज सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को आनंदित कर दिया। चरकुला नृत्य, मयूर नृत्य, भवई नृत्य, ब्रज की होली और नरसिंह अवतार नृत्य ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। भक्तों के आग्रह पर स्वयं डॉ. शिवम साधक जी महाराज भी नृत्य में शामिल हुए।

    यह शिव कथा ब्रह्मलीन भक्ति सम्राट संत गुरुजी शिवानंद साधक जी महाराज (डेरा वाले बाबा, वृंदावन) की असीम कृपा एवं डॉ. शिवम साधक जी महाराज के सानिध्य में 8 फरवरी से प्रतिदिन दोपहर 1 से 4 बजे तक आयोजित हो रही है, जो 15 फरवरी तक चलेगी।

    आयोजकों ने बताया कि महाशिवरात्रि के अवसर पर 108 विशेष रुद्राभिषेक, भगवान शिव की भव्य बारात यात्रा तथा एक कन्या विवाह का आयोजन किया जाएगा। 13 फरवरी को हल्दी-मेहंदी एवं भजन संध्या, 14 फरवरी को हिंडोला उत्सव एवं भजन संध्या और अंतिम दिन 15 फरवरी को 108 अभिषेक व ज्योतिर्लिंग पूजन होगा।

    श्रद्धालुओं से प्रतिदिन कथा में भाग लेकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की गई है।

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