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    Homeराज्यराजस्थानकरौली के मथारा गाँव में जल संरक्षण मॉडल बना मिसाल

    करौली के मथारा गाँव में जल संरक्षण मॉडल बना मिसाल

    सामुदायिक जल प्रयासों से सूखी नदियों को मिला नया जीवन, यूपी के अधिकारियों ने किया अध्ययन

    करौली। बंदूकों से बहती धार तक की प्रेरक गाथा करौली जिले के मथारा गाँव में साकार होती दिखाई दे रही है। राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय अध्ययन भ्रमण के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए अधिकारियों ने पहाड़ और नदी के गहरे संबंधों को समझने के लिए मथारा गाँव का दौरा किया।

    इस परिवर्तन की पृष्ठभूमि में जल पुरुष के नाम से प्रसिद्ध डॉ. राजेंद्र सिंह की प्रेरणा रही है। उनके मार्गदर्शन में तरुण भारत संघ के सहयोग से वर्ष 2011 से मथारा गाँव में जल संरक्षण कार्य प्रारंभ हुआ।

    21 जल संरचनाओं से लौटी जीवनधारा

    ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयासों से 21 जल संरचनाएँ—ताल, तलैया, बाँध, पगारे, पोखर और चेकडैम—निर्मित किए। नदी के उद्गम क्षेत्रों में जंगल एवं भूमि संरक्षण को प्राथमिकता दी गई। इसके परिणामस्वरूप भूजल स्तर बढ़ा, भूमि में नमी लौटी और सूखी धाराएँ पुनः प्रवाहित होने लगीं।

    अधिकारियों ने पहाड़ी ढाल, जलग्रहण क्षेत्र, प्रवाह दिशा और संरचनाओं की स्थिति का स्थल निरीक्षण किया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय स्तर पर निर्मित संरचनाएँ मिलकर व्यापक जल संतुलन स्थापित करती हैं और नदी तंत्र को पुनर्जीवित करती हैं।

    इसी क्रम में अधिकारियों ने खर्राबाई नदी के दक्षिणी क्षेत्र, बमया के उत्तरी भाग तथा बद्द नदी के पूर्वी प्रवाह का अवलोकन किया। खर्राबाई नदी के निकट अधिकारी भूरी सिंह के घर पहुँचे और परिवार से संवाद किया। यह दृश्य इस परिवर्तन की जीवंत कहानी प्रस्तुत करता है—जहाँ कभी बीहड़ और अस्थिरता थी, वहाँ आज खेती, समृद्धि और आत्मनिर्भरता है।

    सहभागिता से बना मॉडल

    अधिकारियों को पाँच-पाँच के समूहों में विभाजित कर नदी तंत्र का नक्शा तैयार कराया गया। जल संरचनाओं को चिह्नित कर यह विश्लेषण प्रस्तुत किया गया कि यह मॉडल उत्तर प्रदेश की छोटी नदियों के पुनरोद्धार में किस प्रकार कारगर हो सकता है।

    आज वही क्षेत्र सरसों, धान, गेहूँ और अन्य फसलों के उत्पादन का उदाहरण बन चुका है। खेती ने आजीविका और सामाजिक सम्मान को पुनर्स्थापित किया है।

    डॉ. राजेंद्र सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा, “पानी सबका है—मनुष्य का भी, पशु-पक्षियों का भी और पेड़-पौधों का भी। जल पर किसी एक का अधिकार नहीं; यह प्रकृति का सामूहिक वरदान है।”

    अध्ययन के समापन पर राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, उत्तर प्रदेश की को-यूनिट हेड सोनालिका सिंह ने कहा कि यह मॉडल उत्तर प्रदेश में नदी पुनरोद्धार के प्रयासों को व्यावहारिक दिशा दे सकता है।

    पूर्व दस्यु बच्ची सिंह ने भावुक होकर कहा, “पानी आने से हमारा गौरव, सम्मान और प्राण सब लौट आए हैं। अब हम पानीदार होकर जी रहे हैं। हमने बंदूकें छोड़कर खेती को अपनाया।”

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