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    जोधपुर में वृहद कृषि विज्ञान मेला, किसानों को जैविक खेती का संदेश

    कृषि विश्वविद्यालय परिसर में कृषि नवाचारों और उन्नत खेती पर जोर, अनार, अंजीर व खजूर जैसे फलों से प्रदेश की बन रही नयी पहचान

    जोधपुर। कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि समय साक्षी है जब प्रदेश सूखाग्रस्त व रेतीले धोरों के रूप में जाना जाता था, लेकिन आज कृषि वैज्ञानिकों और काश्तकारों की मेहनत से अनार, अंजीर व खजूर जैसे फलों की बेहतरीन पैदावार हो रही है। उन्होंने कहा कि गाजर व मूंगफली की प्रचुर पैदावार अन्य शहरों में निर्यात की जा रही है, ऐसे में मंडी की स्थापना से किसानों को और अधिक लाभ मिलेगा।

    वे शनिवार को कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर में नाबार्ड, इफको और आत्मा (कृषि विभाग) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वृहद कृषि विज्ञान मेले को संबोधित कर रहे थे।

    जैविक खेती अपनाने का आह्वान

    मंत्री पटेल ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से धरती बीमार हो रही है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिक जैविक उर्वरकों के नए विकल्प दे रहे हैं। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए किसानों को स्वास्थ्य व गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए जैविक खेती अपनानी चाहिए।

    उन्होंने किसानों से खेतों में ‘डिग्गी-पौंड’ की अवधारणा अपनाने का आह्वान किया, जिससे फसलों को दोगुना लाभ मिल सकता है। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि खेती से विमुख हो रहे युवा सरकार की योजनाओं और आधुनिक तकनीकों का लाभ लेकर कृषि की ओर लौटें, क्योंकि किसान की समृद्धि से ही देश की आर्थिक उन्नति संभव है।

    कृषि से बेरोजगारी का समाधान

    कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि किसान आयोग के अध्यक्ष सी आर चौधरी ने कहा कि उन्नत खेती का संदेश हर गांव और ढाणी तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी कम करने में कृषि सबसे प्रभावी उपाय है। जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, इसलिए गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. वीएस जैतावत ने कहा कि पारंपरिक कृषि को आधुनिक नवाचारों से जोड़कर विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने जोधपुर जीरा-1 किस्म, सोजत में मेहंदी कटाई मशीन और अनुदानित ड्रोन पायलट प्रशिक्षण जैसी पहल किसानों को दी है।

    125 से अधिक स्टॉल्स में कृषि नवाचार

    मेले की थीम “मरुधरा में विकसित कृषि: आत्मनिर्भर भारत” रही। विश्वविद्यालय परिसर में 125 से अधिक सरकारी और गैर-सरकारी स्टॉल्स लगाए गए, जिनमें कृषि स्टार्टअप, आधुनिक कृषि उपकरण, बीज, उर्वरक, कीटनाशक, आयुर्वेदिक उत्पाद और मूल्य संवर्धन तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।

    वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने किसानों को अनुसंधान क्षेत्रों का भ्रमण कराया और उन्नत बीज व तकनीकों की जानकारी दी। प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. सेवा राम कुमावत के अनुसार मेले में लगभग 4000 किसानों ने भाग लिया।

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