सरकार ने देश के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सात नई पहल की घोषणा की है, जिनमें ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट सहायता और वैकल्पिक व्यापार वित्त साधनों को समर्थन शामिल है। ये कदम 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत उठाए गए हैं, जिसके 10 घटकों में से तीन को पहले ही जनवरी में लागू किया जा चुका है।
सरकार की घोषित सात प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं:
डायरेक्ट ई-कॉमर्स क्रेडिट फैसिलिटी- ई-कॉमर्स निर्यातकों को 50 लाख रुपये तक कर्ज सहायता, 90% गारंटी कवरेज के साथ।
ओवरसीज इन्वेंट्री क्रेडिट फैसिलिटी- विदेश में स्टॉक रखने के लिए 5 करोड़ रुपये तक सहायता, 75% गारंटी और 2.75% ब्याज सब्सिडी।
एक्सपोर्ट फैक्टरिंग पर ब्याज सब्सिडी- एमएसएमई के लिए सस्ती कार्यशील पूंजी हेतु फैक्टरिंग लागत पर 2.75% ब्याज सहायता (सीमा 50 लाख रुपये सालाना)।
उच्च जोखिम/नए बाजारों के लिए ट्रेड फाइनेंस सपोर्ट- लेटर ऑफ क्रेडिट कन्फर्मेशन और नेगोशिएशन जैसे क्रेडिट एन्हांसमेंट साधनों को समर्थन।
TRACE (ट्रेड रेगुलेशन्स, एक्रेडिटेशन एंड कम्प्लायंस एनेबलमेंट)- अंतरराष्ट्रीय टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और अनुपालन खर्च पर 60% से 75% तक प्रतिपूर्ति (सीमा 25 लाख रुपये प्रति IEC)।
FLOW (लॉजिस्टिक्स, ओवरसीज वेयरहाउसिंग एंड फुलफिलमेंट)- विदेशी वेयरहाउसिंग, ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट हब और ग्लोबल वितरण नेटवर्क तक पहुंच के लिए परियोजना लागत का 30% तक समर्थन।
LIFT और INSIGHT सपोर्ट- दूरदराज/पहाड़ी क्षेत्रों के निर्यातकों को फ्रेट पर 30% तक सहायता (LIFT) और ट्रेड इंटेलिजेंस व फैसिलिटेशन परियोजनाओं के लिए 50% तक वित्तीय सहयोग (INSIGHT)।
सरकार का कहना है कि इन समन्वित वित्तीय और पारिस्थितिकी तंत्र आधारित उपायों के माध्यम से पूंजी लागत में कमी, व्यापार वित्त के विकल्पों का विस्तार, अनुपालन क्षमता में सुधार, लॉजिस्टिक्स बाधाओं का समाधान और एमएसएमई के लिए वैश्विक बाजारों में बेहतर एकीकरण सुनिश्चित किया जाएगा।


