More
    Homeराज्यमध्यप्रदेशजबलपुर में 9 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का मामला उजागर

    जबलपुर में 9 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का मामला उजागर

    Jabalpur News: जबलपुर स्थित आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने यात्री बसों से जुड़े बड़े टैक्स घोटाले का खुलासा करते हुए गुरुवार रात बस मालिकों और परिवहन विभाग के एक कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. यह पूरा प्रकरण लगभग नौ करोड़ रुपये की राजस्व हानि से संबंधित बताया जा रहा है. मामले में डिंडोरी के बस संचालक संजय केशवानी और साधना केशवानी के साथ ही जिला परिवहन कार्यालय डिंडोरी में पदस्थ रहे तथा वर्तमान में नरसिंहपुर में कार्यरत लिपिक पुष्प कुमार प्रधान को आरोपी बनाया गया है.इनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(4), 61(2), 238(सी) और धारा 7(सी) के तहत प्रकरण दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

    भोपाल से मिली शिकायत के बाद जांच शुरू

    सूत्रों के मुताबिक, ईओडब्ल्यू को भोपाल से शिकायत मिली थी कि संजय और साधना केशवानी के नाम दर्ज कई यात्री बसों पर भारी टैक्स बकाया होने के बावजूद उन्हें परमिट और फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए. प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दोनों के नाम पर कुल 16 बसें पंजीकृत थीं, जिनका रजिस्ट्रेशन डिंडोरी, जबलपुर, शहडोल, मंडला और बालाघाट जिलों में था. ये बसें डिंडोरी-जबलपुर, डिंडोरी-बम्हनी, बिछिया-डिंडोरी और अमरकंटक-मलाजखंड मार्गों पर संचालित हो रही थीं।

    2006 से 2025 तक टैक्स नहीं किया जमा

    जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि इन 16 बसों में से कई वाहनों का वर्ष 2006 से लेकर 2025 तक का टैक्स जमा नहीं किया गया. आरोप है कि वाहन स्वामियों ने बसों को कबाड़ में बेच देने की सूचना परिवहन कार्यालय को देकर वर्ष 2006 से टैक्स अदा करना बंद कर दिया था।

    वसूली प्रक्रिया के दौरान फाइलें गायब होने का आरोप

    वर्ष 2017 में जब जिला परिवहन कार्यालय डिंडोरी ने बकाया कर की वसूली की प्रक्रिया शुरू की, उसी दौरान संबंधित लिपिक पुष्प कुमार प्रधान पर टैक्स से जुड़ी फाइलें गायब करने का आरोप लगा. फाइलें उपलब्ध न होने के कारण विभाग प्रभावी वसूली नहीं कर पाया, जिससे शासन को करीब नौ करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

    आपराधिक षड्यंत्र और पद के दुरुपयोग की आशंका

    ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच में बस संचालकों और परिवहन विभाग के कर्मचारी के बीच आपराधिक षड्यंत्र की आशंका जताई गई है. यह भी पाया गया कि कुछ वाहनों को बिना विधिवत अनुमति के नष्ट कर दिया गया. आरोप है कि संबंधित लिपिक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बकाया कर से जुड़े मूल अभिलेख सुरक्षित नहीं रखे, जिससे आरोपियों को अनुचित लाभ मिला. फिलहाल एजेंसी पूरे मामले की गहनता से पड़ताल कर रही है और संबंधित दस्तावेजों व जिम्मेदारियों की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here