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    Homeराजनीतिआदिवासी संस्कृति को लेकर सियासी घमासान, पूर्व विधायक ने भाजपा को घेरा

    आदिवासी संस्कृति को लेकर सियासी घमासान, पूर्व विधायक ने भाजपा को घेरा

    नारायणपुर। विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन को लेकर बस्तर अंचल के नारायणपुर जिले में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस के पूर्व विधायक चंदन कश्यप ने राज्य की भाजपा सरकार पर आदिवासी समुदाय की अनदेखी करने का सीधा आरोप लगाया है। राजीव भवन में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कश्यप ने कहा कि भाजपा और आरएसएस की नीतियां आदिवासी समाज की विशिष्ट संस्कृति, परंपराओं और अस्मिता को प्रभावित कर रही हैं।

    सरकारी स्तर पर शुभकामना संदेश न देने पर उठाए सवाल

    पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि 9 अगस्त को मनाए गए विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री की ओर से आदिवासी समाज के लिए कोई आधिकारिक शुभकामना संदेश जारी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 32 प्रतिशत आबादी आदिवासी समुदाय की है, ऐसे में शासकीय स्तर पर इस दिवस का समुचित आयोजन न होना सरकार की संकीर्ण मानसिकता को उजागर करता है।

    मूल पहचान और संवैधानिक अधिकारों की उपेक्षा का आरोप

    चंदन कश्यप ने कहा कि सत्ता पक्ष आदिवासियों को 'वनवासी' कहकर उनकी मूल पहचान और जल, जंगल, जमीन से जुड़े प्राथमिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए वन अधिकार पट्टे और मनरेगा के जरिए रोजगार की मजबूत व्यवस्था की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी केवल राजनीतिक वोट बैंक नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक धरोहर का मुख्य आधार हैं।

    विरोध के बावजूद जारी रहेगा उत्साह, कांग्रेसी रहे मौजूद

    कश्यप ने कहा कि प्रशासनिक या राजनीतिक उपेक्षा के बावजूद आदिवासी समाज अपने अस्तित्व और गौरव के इस पर्व को भविष्य में भी पूरे उत्साह के साथ मनाता रहेगा। इस पत्रकार वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश दीवान, रजनू नेताम, देवनाथ उसेंडी, रघु मानिकपुरी, पंडी राम वड्डे और शिव कुमार पांडेय समेत पार्टी के कई प्रमुख पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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