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    गुजरात में 9 साल बाद सही हुआ पैसा, 10,000 के ATM विड्रॉल में मिली गड़बड़ी का मुआवजा 3.28 लाख

    गुजरात। के सूरत से रोचक मामला सामने आया है। नौ साल पहले एक व्यक्ति को एटीएम से 10 हजार रुपये की निकासी में गड़बड़ी का सामना करना पड़ा था। नौ साल के लंबे इंतजार के बाद अब उपभोक्ता अदालत ने पीड़ित को 3.28 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। कंज्यूमर कोर्ट ने यह आदेश बैंक ऑफ बड़ौदा को दिया है, क्योंकि क्योंकि बैंक लगभग नौ साल तक 10,000 रुपये के असफल ATM विड्रॉल को वापस नहीं कर पाया था। अदालत ने माना कि बैंक ने सफल ट्रांजैक्शन का कोई सबूत नहीं दिया था।

    एसबीआई का एटीएम, BOB में खाता

    टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार 18 फरवरी 2017 को सूरत के उधना में एक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एटीएसम से रुपये निकालने की कोशिश के दौरान ग्राहक के खाते से पैसे कट गए थे, लेकिन एटीएसम से कैश नहीं निकला। जब बैंक आरबीआई द्वारा तय किए गए पांच दिनों के भीतर कटी हुई राशि वापस नहीं कर पाया, तो ग्राहक ने ट्रांजैक्शन का सबूत या CCTV फुटेज मांगा। 21 फरवरी को बैंक ऑफ बड़ौदा की डुंभाल शाखा में लिखित शिकायत करने और 10 मार्च से 23 मई के बीच कई फॉलोअप ईमेल भेजने के बावजूद, बैंक ने न तो कोई सबूत दिया और न ही कटी हुई राशि वापस की।

    आरटीआई का लिया सहारा

    पीड़ित खाताधारक ने ने 21 अप्रैल, 2017 को एसबीआई में एक आरटीआई भी दायर की। इसमें सीसीटीवी फुटेज की मांग की गई थी। 20 दिसंबर, 2017 को वह सूरत उपभोक्ता फोरम पहुंचा और 10,000 रुपये की राशि वापस करने के साथ-साथ मुआवजे और ब्याज की भी मांग की। इस मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया दोनों को प्रतिवादी बनाया। बैंक ऑफ बड़ौदा के वकील ने यह तर्क दिया कि चूंकि पैसे निकालने की कोशिश एसबीआई के एटीएसम से की गई थी, इसलिए बैंक इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। वकील ने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने सीसीटीवी फुटेज के लिए एसबीआई को दो बार पत्र लिखा था, लेकिन उसे फुटेज नहीं मिली।

    बैंक ने ट्रांजैक्शन को दिखाया सफल

    एक्वायरिंग बैंक (SBI) से मिले जवाब के आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा ने दावा किया कि विड्रॉल को सफल दिखाया गया था और उसने किसी भी तरह की अनुचित व्यापार प्रथा से इनकार किया। एसबीआई कोर्ट में पेश नहीं हुआ। कोर्ट ने पाया कि बैंक ऑफ बड़ौदा लिखित शिकायत और कानूनी नोटिस मिलने के बाद भी इस मामले को सुलझाने में नाकाम रहा। यह फैसला दिया कि बैंक सीसीटीवी फुटेज शेयर न करने के एसबीआई के फेलियर को अपनी सफाई के तौर पर पेश नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि कस्टमर का इससे कोई लेना-देना नहीं है। यह बैंक ऑफ बड़ौदा की जिम्मेदारी थी कि वह मजबूत सबूतों के साथ पैसे निकालने की बात साबित करे।

    RBI के सर्कुलर का दिया हवाला

    सूरत कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (CDRC एडिशनल) ने एटीएम से पैसे निकालने के बारे में 2019 के आरबीआई सर्कुलर का हवाला दिया। जिसके तहत फेल हुए ट्रांजेक्शन को पांच दिनों के अंदर रिवर्स करना जरूरी है। इतना ही नहीं देरी होने पर हर दिन 100 रुपये का मुआवजा देने का प्रावधान है। कमीशन ने बैंक ऑफ बड़ौदा को आदेश दिया कि वह 24 फरवरी, 2017 से लेकर 10,000 रुपये 9 फीसदी ब्याज के साथ वापस करने तक हर दिन 100 रुपये का भुगतान करे। 26 फरवरी, 2026 के आदेश के मुताबिक देरी 3,288 दिनों की हो गई है, जिसकी कुल रकम 3,28,800 रुपये बनती है। बैंक ऑफ बड़ौदा को 30 दिनों के अंदर यह रकम चुकानी होगी। अगर बैंक आखिरी दिन पेमेंट करता है, तो 3,315 दिनों की देरी के हिसाब से मुआवजे की रकम बढ़कर 3,31,500 रुपये हो जाएगी।

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