दिल्ली में देर रात हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा इसी का उदाहरण रहा, जहां पार्टी के शीर्ष नेता जुटे और चुनावी रणनीति पर गहन मंथन हुआ। बैठक में सबसे अहम मुद्दा केरल विधानसभा चुनाव के लिए जारी की गई उम्मीदवारों की सूची रही, जिसे राहुल गांधी की नाराजगी के चलते रोक दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने साफ संकेत दिए कि बिना ठोस डेटा, जातीय समीकरण और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर टिकट वितरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़ाने पर भी रोक लगा दी, जिससे कई दिग्गज नेताओं की उम्मीदों को झटका लगा है।
रात 10:30 बजे शुरू हुई केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की बैठक तड़के 2:30 बजे तक चली। इस दौरान तय किया गया कि कोई भी लोकसभा सांसद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगा, ताकि उपचुनाव की स्थिति से बचा जा सके।
टिकट वितरण में केसी वेणुगोपाल का दबदबा साफ नजर आया, जिनके गुट से जुड़े बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को जगह मिली है। वहीं रमेश चेन्निथला और वी डी सतीशन के खेमे को भी संतुलित प्रतिनिधित्व दिया गया। खास बात यह रही कि शशि थरूर ने इस प्रक्रिया में कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाई।
कांग्रेस ने इस बार सोशल इंजीनियरिंग पर खास ध्यान दिया है। ईसाई, नायर और एझावा समुदाय के बीच संतुलन साधने की कोशिश की गई है। 92 में से 52 उम्मीदवार 50 वर्ष से कम उम्र के हैं, जिससे युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया है। हालांकि, महिला प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि केवल 9 महिलाओं को ही टिकट दिया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस इस बार चुनाव में कोई जोखिम लेने के बजाय पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतरना चाहती है, लेकिन अंदरूनी असहमति उसके लिए चुनौती बनी हुई है।
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