CM Vishnu Deo Sai New Vehicle: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अब नई गाड़ियों से चलने वाले हैं. सीएम साय के काफिले में अब देसी अंदाज नजर आएगा क्योंकि सीएम ने अपने काफिले से विदेशी ब्रांड की गाड़ियों को विदा कर दिया है और उनकी जगह ली है भारत की शान बढ़ाने वाली गाड़ियों ने ली है.
ये गाड़ी काफिले में शामिल होगी
सीएम साय अब फॉर्च्यूनर की बजाय स्कॉर्पियो-N से चलने वाले हैं. उनके सुरक्षा काफिले में 6 नई स्कॉर्पियो शामिल की गई हैं, जिनके नंबर में भी बदलाव किया गया है. पहले सीएम साय की गाड़ी का नंबर 9502 था लेकिन अब काफिले में 3011 से लेकर 3026 सीरीज के नंबर शामिल किये गए हैं. इन्हीं गाड़ियों से सीएम साय अब प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा करने वाले हैं. रैलियों में जाने वाले हैं. कार्यक्रमों में शामिल होने वाले हैं. ऐसे में इनकी खासियत क्या है.
गाड़ी की क्या-क्या खासियत है?
- ये सभी गाड़ियां बुलेटप्रूफ हैं यानी कि इन्हें इस तरह से तैयार किया गया है कि इनमें गोलियों, बम धमाकों और ग्रेनेड के हमलों का असर ना पड़े.
- इन सभी गाड़ियों को एक खास तरीके के मजबूत बैलिस्टिक स्टील से तैयार किया गया है.
- इनकी खिड़कियों में मोटी कांच की परतें लगाई गई हैं, जो AK-47 जैसी राइफलों का सामना भी कर सकती हैं.
- ये सभी गाड़ियां 7 सीटर हैं, जिनमें आगे-पीछे कैमरा और सेंसर लगाया गया है.
- सभी गाड़ियां एडास सिस्टम पर काम करती हैं. आसान भाषा में समझें तो ये एक स्मार्ट सुरक्षा सिस्टम है, जो कैमरे और सेंसर की मदद से हादसों को रोकने के लिए काम करता है.
- एडास सिस्टम की वजह से चलते-चलते ऑटोमेटिक ब्रेक लगाने और लेन बदलने में मदद मिलती है.
- साथ ही जब काफिले में कई गाड़ियां होती हैं, तो आगे वाली कार से सही दूरी बनाए रखने में भी मदद मिलती है.
- वहीं अंदर बैठे लोगों की सुरक्षा के लिए 6 एयरबैग मौजूद हैं और लंबी दूरी को समय पर पूरा करने के लिए दमदार इंजन है.
- इसके अलावा ये गाड़ियां पूरी तरह से देसी हैं क्योंकि स्कॉर्पियो बनाने वाली महिंद्रा हमारे देश की कंपनी है. जो अपनी मजबूती और ‘मेड इन इंडिया’ के लिए पहचानी जाती है.
- फॉर्च्यूनर बनाने वाली टोयोटा जापान की कंपनी थी.
गाड़ियों की कीमत क्या है?
पहले इस्तेमाल होने वाली फॉर्च्यूनर की कीमत 55 से 60 लाख रुपये थी, जबकि स्कॉर्पियो-N की कीमत 28 से 30 लाख रुपये है. दोनों गाड़ियों के दामों में आधे से ज्यादा का अंतर है और 30 लाख के आसपास की बचत हुई है.


