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    चीन का दोमुंही चेहरा…….इधर शांतिवार्ता, उधर ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी 

    वॉशिंगटन। अमेरिका की खुफिया एजेंसियों के हवाले से दावा हुआ है कि चीन ईरान को अगले कुछ हफ्तों में एक एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी में है। यूएस इंटेलिजेंस के हवाले से कहा गया हैं कि चीन अगले कुछ हफ्तों के भीतर ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम देने जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया हैं कि ये एक भड़काऊ कदम होगा क्योंकि बीजिंग अमेरिका-ईरान के बीच हुए नाजुक संघर्ष विराम में मध्यस्थता करने में मदद की थी और अब वहां ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम दे रहा है।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मई महीने में चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं और अगर ईरान को चीनी एयर डिफेंस भेजने की तैयारी की रिपोर्ट सही है, तब उनकी यात्रा पर असर पड़ेगा। दो सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि इसतरह के संकेत हैं कि बीजिंग इन खेपों को तीसरे देशों के रास्ते भेजने पर काम कर रहा है ताकि उसका नाम नहीं आ सके और एयर डिफेंस सिस्टम के मूल देश का पता नहीं चल पाए।
    ईरान को हथियारों की खेप भेजने की तैयारी में चीन
    सूत्रों के मुताबिक बीजिंग जिन सिस्टम्स को भेजने की तैयारी कर रहा है वे कंधे से दागी जाने वाली एंटी-एयर मिसाइल सिस्टम्स हैं। इन सिस्टम्स ने पांच हफ्ते तक चले युद्ध के दौरान कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए खतरा पैदा किया था और अगर युद्धविराम टूट जाता है, तब ये फिर से खतरा बन सकते हैं। हालांकि वॉशिंगटन में चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा चीन ने इस संघर्ष में शामिल किसी भी पक्ष को कभी हथियार नहीं दिए हैं। यह जानकारी पूरी तरह से गलत है।
    चीनी दूतावास प्रवक्ता ने कहा कि एक जिम्मेदार बड़े देश के तौर पर चीन हमेशा अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को पूरा करता है। हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह बिना किसी आधार के आरोप लगाने, जान-बूझकर गलत संबंध जोड़ने और सनसनी फैलाने से परहेज करें। हमें उम्मीद है कि संबंधित पक्ष तनाव कम करने में मदद के लिए और ज्यादा प्रयास करेगा। 
    ट्रंप ने संकेत दिया था कि पिछले हफ्ते ईरान ने एफ-15 फाइटर जेट पर हाथ से कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली मिसाइल यानी हीट-सीकिंग मिसाइल से हमला किया था जिसमें अमेरिकी विमान गिर गया था। जबकि ईरान ने कहा कि उसने जेट को गिराने के लिए एक नए एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया है लेकिन उसने इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। यह साफ नहीं है कि वह सिस्टम चीन में बना था या नहीं। सूत्रों ने बताया है कि चीनी कंपनियां ईरान को लगातार ऐसी प्रतिबंधित दोहरे-इस्तेमाल वाली टेक्नोलॉजी बेच रही हैं जिससे ईरान को हथियार बनाने और अपने नेविगेशन सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। लेकिन, अगर चीनी सरकार सीधे तौर पर हथियारों के सिस्टम ईरान को देती है तो यह मदद का एक बिल्कुल नया स्तर होगा। 

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