किसान हितों के लिए प्रस्ताव पारित, महापंचायत ने वैचारिक बदलाव का दिया आह्वान
दूदू। राजस्थान के दूदू जिले में आयोजित किसान महापंचायत की जिला कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में लोकतंत्र में मतदान की भूमिका को सर्वोपरि बताते हुए मतदाताओं से जागरूक होकर अपने अधिकार का उपयोग करने का आह्वान किया गया।
महापंचायत में कहा गया कि लोकतंत्र में समृद्धि का सबसे प्रभावी माध्यम मतदान है। मतदाता यदि अपने समान आर्थिक हितों के आधार पर मतदान करता है, तो जन अपेक्षाओं के पूर्ण होने की संभावना अधिक होती है। वहीं जाति, संप्रदाय या व्यक्तिगत स्वार्थ के आधार पर मतदान करने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते।
प्रस्ताव में किसानों की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि वर्षों से विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा घोषणाएं किए जाने के बावजूद किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की अवधारणा लागू होने के दशकों बाद भी इसका पूरा लाभ किसानों तक नहीं पहुंच सका है। इसके चलते किसान आर्थिक संकट और ऋण के चक्र में फंसता जा रहा है।
महापंचायत में यह भी कहा गया कि सरकारी नीतियों के चलते कृषि क्षेत्र बाजार और कंपनियों के प्रभाव में आ गया है, जिससे किसानों की स्थिति कमजोर होती जा रही है। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई भी समय पर नहीं हो पाती, जिससे किसानों को लगातार संघर्ष करना पड़ता है।
किसान महापंचायत ने स्पष्ट किया कि देश की समृद्धि किसानों की समृद्धि के बिना संभव नहीं है। “खेत को पानी, फसल को दाम और युवाओं को काम” को मूल मंत्र बताते हुए व्यवस्था परिवर्तन के लिए वैचारिक आंदोलन की आवश्यकता पर बल दिया गया।
बैठक में ‘बीती रात हो गई भोर, चलो किसानों राज की ओर’ और ‘वे जाति धर्म से तोड़ेंगे, हम मूंग-चना से जोड़ेंगे’ जैसे नारों के साथ समान आर्थिक हितों के आधार पर मतदान करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया गया।
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